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Date: 24/08/2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि प्रगति सहकारी बैंक लिमिटेड, कर्नाटक पर मौद्रिक दंड लगाया

24 अगस्त 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि प्रगति सहकारी बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 20 अगस्त 2026 के आदेश द्वारा दि प्रगति सहकारी बैंक लिमिटेड, कर्नाटक (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 56 के साथ पठित धारा 20 के प्रावधानों का उल्लंघन और आरबीआई द्वारा जारी ‘निदेशकों, उनके रिश्तेदारों और उन फर्मों/संस्थाओं को ऋण और अग्रिम, जिनमें उनकी रुचि है’, ‘एक्सपोज़र मानदंड और सांविधिक/ अन्य प्रतिबंध – यूसीबी’ और ‘प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों के निवेश संविभाग का वर्गीकरण, मूल्यांकन और परिचालन’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 2 लाख (दो लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। सांविधिक प्रावधानों के उल्लंघन/आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त प्रावधानों और निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

बैंक ने:

  1. निदेशक से संबंधित ऋण मंज़ूर किए थे;

  2. एकल उधारकर्ता एक्सपोज़र के लिए निर्धारित विनियामक सीमा का उल्लंघन किया था; और

  3. विवेकपूर्ण अंतर-बैंक (सकल) एक्सपोज़र सीमा और अंतर-बैंक प्रतिपक्षकार (काउंटर-पार्टी) सीमा का उल्लंघन किया था।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/956

 
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