भुगतान और निपटान प्रणाली

अर्थव्‍यवस्‍था की समग्र दक्षता में सुधार करने में भुगतान और निपटान प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अंतर्गत राशि-मुद्रा, चेकों जैसी कागज़ी लिखतों के सुव्‍यवस्थित अंतरण और विभिन्‍न इलेक्‍ट्रॉनिक माध्‍यमों के लिए विभिन्‍न प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं हैं।

प्रेस प्रकाशनी


(282 kb )
भारतीय रिज़र्व बैंक ने ओला फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

12 जुलाई 2022

भारतीय रिज़र्व बैंक ने ओला फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने ओला फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (संस्था) पर, दिनांक 27 अगस्त 2021 के पीपीआई पर मास्टर निदेश (समय-समय पर यथा अद्यतित) और दिनांक 25 फरवरी 2016 के मास्टर निदेश - अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) निदेश, 2016 (समय-समय पर यथा अद्यतित) के कतिपय प्रावधानों का अननुपालन करने के लिए 1,67,80,000/- (एक करोड़ सड़सठ लाख अस्सी हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है।

यह दंड, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 30 के अंतर्गत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल करना नहीं है।

पृष्ठभूमि

यह पाया गया कि संस्था केवाईसी अपेक्षाओं पर आरबीआई द्वारा जारी निदेशों का अननुपालन कर रही थी। तदनुसार, संस्था को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें उनसे यह पूछा गया कि वे कारण बताएं कि निदेशों का अननुपालन करने के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।

संस्था के उत्तर पर विचार करने के बाद आरबीआई इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि आरबीआई द्वारा जारी निदेशों के अननुपालन के आरोप सिद्ध हुए हैं और मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2022-2023/524

2022
2021
2020
2019
2018
2017
2016
2015
2014
2013
2012
पुरालेख

© भारतीय रिज़र्व बैंक । सर्वाधिकार सुरक्षित

दावा अस्‍वीकरणकहाँ क्‍या है |