अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

(1 अक्टूबर 2021 तक अद्यतन)

प्र.1. एमएसएमई की परिभाषा क्या है?

भारत सरकार के दिनांक 26 जून 2020 के राजपत्र अधिसूचना एस.ओ.2119(ई) के अनुसार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा इस प्रकार है:

(i) सूक्ष्म उद्यम एक ऐसा उद्यम है जहां संयंत्र और मशीनरी या उपस्कर मे विनिधान 1 करोड़ से अधिक नहीं है और आवर्तन 5 करोड़ से अधिक नहीं है;

(ii) लघु उद्यम एक ऐसा उद्यम है जहां संयंत्र और मशीनरी या उपस्कर मे विनिधान 10 करोड़ से अधिक नहीं है और आवर्तन 50 करोड़ से अधिक नहीं है; और

(iii) मध्यम उद्यम एक ऐसा उद्यम है जहां संयंत्र और मशीनरी या उपस्कर मे विनिधान 50 करोड़ से अधिक नहीं है और आवर्तन 250 करोड़ से अधिक नहीं है।

सभी उद्यमों को उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना और 'उद्यम रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र' प्राप्त करना आवश्यक है। (दिनांक 02 जुलाई 2020 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.बीसी.सं.3/06.02.31/2020-21, दिनांक 21 अगस्त 2020 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.बीसी.सं.4/06.02.31/2020-21, दिनांक 07 जुलाई 2021 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.बीसी.सं.13/06.02.31/2021-22 को देखें)

प्र.2. बैंकों द्वारा इस क्षेत्र को उधार देना किस श्रेणी में आता है?

बैंक द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिए गए ऋण निम्नानुसार प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार हेतु माना जाएगा:

(i) एमएसएमई की परिभाषा, भारत सरकार के दिनांक 26 जून 2020 के राजपत्र अधिसूचना एस.ओ.2119(ई) के साथ पठित दिनांक 02 जुलाई 2020 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.बीसी.सं.3/06.02.31/2020-21, दिनांक 21 अगस्त 2020 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.बीसी.सं.4/06.02.31/2020-21 और दिनांक 07 जुलाई 2021 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.बीसी.सं.13/06.02.31/2021-22, समय-समय पर अद्यतन, के अनुसार होगी।

(ii) इसके अलावा ऐसे एमएसएमई, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी भी उद्योग से संबंधित किसी भी प्रकार के विनिर्माण या वस्तुओं के उत्पादन में लगे होने चाहिए या सेवा अथवा सेवाएं उपलब्ध या प्रदान करने में संलग्न होने चाहिए। उपरोक्त दिशानिर्देशों के अनुरूप एमएसएमई को दिए गए सभी बैंक ऋण प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के अंतर्गत वर्गीकरण के लिए पात्र हैं।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को उधार देने से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 24 जुलाई 2017 के हमारे मास्टर निदेश विसविवि.एमएसएमई एवं एनएफएस.12/06.02.31/2017-18 में उपलब्ध हैं। विभिन्न मामलों पर आरबीआई द्वारा बैंकों को जारी दिशानिर्देश हमारी वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध हैं।

प्र.3. क्या खुदरा और थोक व्यापार को एमएसएमई के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने दिनांक 2 जुलाई 2021 के अपने कार्यालय ज्ञापन (ओएम) सं.5/2(2)/2021-ई/पी एंड जी/पॉलिसी के माध्यम से खुदरा और थोक व्यापार के लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी है। विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 07 जुलाई 2021 के हमारे परिपत्र विसविवि.एमएसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.13/06.02.31/2021-22 में उपलब्ध हैं।

प्र.4. प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार का क्या अर्थ है?

प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार में प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र के हिस्से के रूप में केवल वे क्षेत्र शामिल हैं जो आबादी के बड़े हिस्से, कमजोर वर्गों और रोजगार-प्रधान क्षेत्रों जैसे कृषि, और सूक्ष्म और लघु उद्यमों को प्रभावित करते हैं। प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार पर विस्तृत दिशानिर्देश ‘प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार’ पर हमारे दिनांक 04 सितंबर 2020 के मास्टर निदेश विसविवि.केंका.प्लान.बीसी.5/04.09.01/2020-21 में उपलब्ध हैं और समय-समय पर अद्यतन किए जाते हैं।

प्र.5. क्या बैंकों द्वारा एमएसएमई को उधार देने के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं?

घरेलू वाणिज्यिक बैंकों, 20 और उससे अधिक शाखाओं वाले विदेशी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और लघु वित्त बैंकों के लिए समग्र प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के तहत सूक्ष्म (माइक्रो) उद्यमों को उधार देने के लिए समायोजित निवल बैंक ऋण (एएनबीसी) या तुलनपत्र वाह्य एक्सपोजर के समतुल्य ऋण (सीईओबीई), जो भी अधिक हो, का 7.5 प्रतिशत का उप-लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

प्र.6. बैंक उधारकर्ताओं की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं का आंकलन कैसे करते हैं?

बैंकों को सूचित किया गया है कि वे अपने निदेशक मंडल द्वारा विधिवत अनुमोदित एमएसई क्षेत्र के लिए ऋण सुविधाएं प्रदान करने वाली ऋण नीतियां बनाएं (दिनांक 04 मई 2009 के परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.102/06.04.01/2008-09 को देखें)। तथापि, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे उधारकर्ताओं के व्यापार चक्र और अल्पकालिक ऋण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उनकी वास्तविक कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के उचित मूल्यांकन के बाद ऋण सीमाओं को मंजूरी दें। नायक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, लघु उद्योग इकाइयों के लिए कार्यशील पूंजी सीमा की गणना उनके अनुमानित कुल कारोबार के न्यूनतम 20% के आधार पर 5 करोड़ की क्रेडिट सीमा तक की जाती है।

प्र.7. क्या बैंकों द्वारा सम्मिश्र ऋण प्रदान करने का कोई प्रावधान है?

माइक्रो, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को उधार पर दिनांक 24 जुलाई 2017 के हमारे मास्टर निदेश के अनुसार बैंकों द्वारा 1 करोड़ तक की संमिश्र ऋण सीमा स्वीकृत की जा सकती है ताकि एमएसई उद्यमी एक ही स्थान पर अपनी कार्यशील पूंजी और मीयादी ऋण संबंधी आवश्यकता को प्राप्त कर सकें। सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को हमारे दिनांक 4 मई 2009 के परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई एंड एनएफएस.बीसी.सं.102/06.04.01/2008-09 द्वारा सूचित किया गया था कि जिन बैंकों ने एकल या संयुक्त रूप से मीयादी ऋण स्वीकृत किया है, उन्हें एकल रूप से (या संयुक्त रूप से, मीयादी ऋण के अनुपात में) कार्यशील पूंजी (डब्ल्यूसी) सीमा को भी मंजूरी देनी चाहिए ताकि वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने में देरी से बचा जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी मामला ऐसा नहीं है जहां मीयादी ऋण स्वीकृत किया गया हो परंतु कार्यशील पूंजी सुविधाएं अभी तक स्वीकृत नहीं हुई हो।

प्र.8. क्लस्टर फाइनेंसिंग क्या है?

ऋण देने के लिए क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण का उद्देश्य एमएसई क्षेत्र की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक पूर्ण-सेवा दृष्टिकोण प्रदान करना है जिसे मान्यता प्राप्त एमएसई समूहों को बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण, (ए) स्पष्ट परिभाषित और मान्यता प्राप्त समूहों के साथ कारोबार करने में (बी) जोखिम मूल्यांकन के लिए उपयुक्त जानकारी की उपलब्धता (ग) ऋणदाता संस्थानों द्वारा निगरानी और (घ) लागत कम करने में, अधिक फायदेमंद हो सकता है।

अतः बैंकों को सूचित किया गया है कि वे इसे एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में मानें और एसएमई वित्तपोषण के लिए इसे तेज गति से अपनाएं। बैंकों को यह भी सूचित किया गया है कि वे विभिन्न एमएसई समूहों में अधिक एमएसई केंद्रित शाखा कार्यालय खोलें जो एमएसई के लिए परामर्श केंद्र के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। जिले का प्रत्येक अग्रणी बैंक कम से कम एक क्लस्टर को अपनाए (दिनांक 29 जून 2010 के परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.सं.बीसी.90/06.02.31/2009-10 को देखें)।

प्र.9. वाणिज्यिक बैंकों द्वारा संवितरित ऋणों के लिए ब्याज दरों पर आरबीआई के दिशानिर्देश क्या हैं?

वित्तीय क्षेत्र के उदारीकरण के अंतर्गत, ब्याज वसूलने सहित बैंकों के सभी ऋण संबंधी मामलों को आरबीआई द्वारा अविनियमित किया गया है और यह बैंकों द्वारा उनकी अपनी उधार नीतियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

मौद्रिक नीति संचारण में सुधार की दृष्टि से, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे सूक्ष्म और लघु उद्यमों के ऋणों को 01 अक्टूबर 2019 से एक बाहरी बेंचमार्क से लिंक करें (दिनांक 04 सितंबर 2019 के परिपत्र बैंविवि.डीआईआर.बीसी.सं.14/13.03.00/2019 को देखें)। मौद्रिक नीति दरों के संचारण में और सुधार करने के लिए, यह निर्णय लिया गया है कि 01 अप्रैल 2020 से मध्यम उद्यमों को ऋण बाहरी बेंचमार्क से जोड़ा जाएगा। (दिनांक 26 फरवरी 2020 के परिपत्र विवि.डीआईआर.बीसी.सं.39/13.03.00/2019-20 को देखें)

प्र.10. क्या एमएसई उधारकर्ताओं को बैंकों से संपार्श्विक मुक्त ऋण मिल सकता है?

दिनांक 6 मई 2010 के हमारे परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.79/06.02.31/2009-10 के अनुसार, बैंकों को आदेश दिया गया है कि एमएसई क्षेत्र में इकाइयों को 10 लाख तक दिए गए ऋणों के मामलों में संपार्श्विक जमानत स्वीकार न करें।

प्र.11. एमएसई के लिए ऋण गारंटी निधि न्यास योजना क्या है?

एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार और सिडबी ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि न्यास (सीजीटीएमएसई) की स्थापना की है ताकि एमएसई क्षेत्र में संपार्श्विक/तृतीय पक्ष गारंटी की आवश्यकता के बिना ऋण के प्रवाह को सुविधाजनक बनाया जा सके। योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि ऋणदाता को परियोजना की व्यवहार्यता को महत्व देना चाहिए और वित्तपोषित परिसंपत्तियों की प्राथमिक जमानत पर ऋण सुविधा को सुरक्षित करना चाहिए। क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएस) ऋणदाता को आश्वस्त करती है कि यदि कोई एमएसई इकाई, जिसने संपार्श्विक - मुक्त ऋण सुविधाओं का लाभ उठाया है, ऋणदाता को अपनी देनदारियां चुकाने में विफल रहता है तो गारंटी ट्रस्ट, योजना के अनुसार ऋणदाता को हुए नुकसान की भरपाई करेगा।

सीजीटीएमएसई 200 लाख तक की ऋण सुविधा के लिए कवर प्रदान करेगा, जिसे उधार देने वाले संस्थानों द्वारा बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा और/या तीसरे पक्ष की गारंटी के दिया गया है। गारंटी कवर का लाभ उठाने के लिए सीजीटीएमएसई द्वारा गारंटी और वार्षिक सेवा शुल्क लिया जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप www.cgtmse.in को देख सकते हैं।

प्र.12. क्या एमएसई उधारकर्ताओं के लिए क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य है?

विनियामक पूंजी के नजरिए से बाहरी रेटिंग एजेंसियों द्वारा क्रेडिट रेटिंग तबतक अनिवार्य नहीं है जबतक किसी प्रतिपक्षकार के लिए कुल अधिकतम एक्सपोजर 7.5 करोड़ की सीमा से अधिक नहीं है, बशर्ते कुछ अन्य शर्तों को पूरा करने के अधीन।

प्र.13. एमएसई उधारकर्ताओं को विलंबित बकाया भुगतान के लिए क्या दिशानिर्देश हैं?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (एमएसएमईडी), 2006 के अधिनियमन के साथ, एमएसएमई इकाइयों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए, खरीदारों द्वारा भुगतान निम्नानुसार किया जाना है:

(i) क्रेता को उसके और आपूर्तिकर्ता के बीच लिखित रूप में सहमत तारीख को या उससे पूर्व आपूर्तिकर्ता को भुगतान करना होगा और यदि कोई करार नहीं हुआ हो तो नियत दिन से पूर्व भुगतान करना होगा। आपूर्तिकर्ता और क्रेता के बीच की सहमत अवधि 45 (पैंतालीस) दिनों से अधिक नहीं होगी।

(ii) यदि क्रेता आपूर्तिकर्ता को राशि का भुगतान नहीं कर पाया तो वह राशि पर नियत दिन या निर्धारित तारीख से रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित बैंक दर का तीन गुना चक्रवृद्धी ब्याज, मासिक आधार पर भुगतान करने हेतु बाध्य होगा।

(iii) आपूर्तिकर्ता द्वारा माल की आपूर्ति या दी गई सेवा के लिए क्रेता उक्त (ii) में सूचित ब्याज के भुगतान हेतु बाध्य होगा।

(iv) किसी देय राशि में विवाद होने पर संबंधित राज्य सरकार द्वारा गठित माइक्रो और लघु उद्यम सुविधा सेवा परिषद से संपर्क किया जाएगा।

बड़े कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं द्वारा एमएसई को भुगतान संबंधी दायित्वों के निर्वहन के लिए, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे अपने बड़े कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं (अर्थात बैंकिंग प्रणाली से 10 करोड़ और उससे अधिक की कार्यशील पूंजी सीमा का लाभ लेने वाले उधारकर्ता) को ऋण सीमा स्वीकृत/नवीनीकरण करते समय समग्र सीमाओं के भीतर, विशेष रूप से एमएसई से खरीद के संबंध में नकद आधार पर या बिल के आधार पर भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए, अलग से उप-सीमाएं तय करें।

बैंकों को यह भी सूचित किया गया था कि वे उप-सीमाओं में परिचालनों, विशेष रूप से एमएसई आपूर्तिकर्ताओं को देय राशि की सीमा के संदर्भ में, अपने कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं से समय-समय पर पता लगाकर, एमएसई इकाइयों को उनके कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं द्वारा देय राशि, की बारीकी से निगरानी करें तथा यह सुनिश्चित करें कि कार्पोरेट इस प्रयोजन हेतु सृजित उप-सीमा में उपलब्ध शेष राशि का उपयोग करके 'नियत दिन'/सहमत तिथि से पहले इस तरह के बकाया का भुगतान करें। (दिनांक 16 अक्तूबर 2000 के परिपत्र आईईसीडी/5/08.12.01/2000-01 तथा दिनांक 30 मई 2003 को पुनः दोहराए गए परिपत्र आईईसीडी.सं.20/08.12.01/2002-03 को देखें)।

प्र.14. कोई बैंक या लेनदार एमएसएमई खाते में आरंभिक दबाव की पहचान कैसे कर सकता है?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उध्यम के ऋण खाते को अनर्जक आस्तियों (एनपीए) में परिवर्तित होने से पूर्व बैंकों/ ऋणदाताओं को चाहिए कि वे नीचे दिए गए तालिका के अनुसार विशेष उल्लिखित खाता (एसएमए) के अधीन तीन उपश्रेणियाँ सृजित कर खाते में दबाव की पहचान करें:

एसएमए उप श्रेणी वर्गीकरण हेतु आधार
एसएमए-0 मूलधन या ब्याज का भुगतान 30 दिनों से अधिक के लिए अतिदेय नहीं हो परंतु आरंभिक दबाव दर्शाने वाला खाता
एसएमए-1 मूलधन या ब्याज का भुगतान 31 से 60 दिनों के बीच अतिदेय
एसएमए-2 मूलधन या ब्याज का भुगतान 61 से 90 दिनों के बीच अतिदेय

प्र.15. 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के पुनर्वास और पुनरुद्धार के लिए ढांचा' पर दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

ढांचे की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

(i) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उध्यम के ऋण खाते को अनर्जक आस्तियों (एनपीए) में परिवर्तित होने से पूर्व बैंकों/ ऋणदाताओं को चाहिए कि वे ढांचे में दिए गए अनुसार विशेष उल्लिखित खाता (एसएमए) के अधीन तीन उपश्रेणियाँ सृजित कर खाते में आरंभिक दबाव की पहचान करें।

(ii) कोई भी एमएसएमई उधारकर्ता स्वेच्छा से इस ढांचे के तहत कार्यवाही शुरू कर सकता है।

(iii) सुधारात्मक कार्य योजना तय करने के लिए समिति दृष्टिकोण अपनाया जाना।

(iv) ढांचे के तहत विभिन्न निर्णय लेने के लिए समय सीमा तय की गई है।

प्र.16. उपरोक्त ढांचे के प्रावधान किन खातों पर लागू होते हैं?

इस ढांचे में किए गए प्रावधान 25 करोड़ तक की सीमा के तहत एमएसएमई ऋण, कंसोर्टियम या बहु बैंकिंग व्यवस्था (एमबीए) के अंतर्गत खातों सहित, पर लागू होंगे।

प्र.17. समिति ढांचे के तहत खातों में तनाव का समाधान कैसे करती है?

समिति खाते में दबाव के समाधान के लिए विभिन्न विकल्प तलाश सकती है। समिति किसी विशेष प्रस्ताव विकल्प को प्रोत्साहित करने का प्रयास नहीं करती है तथा प्रत्येक मामले की विशिष्ट आवश्यकता और स्थिति के अनुसार सुधारात्मक कार्य योजना (सीएपी) का निर्धारण करती है। समिति द्वारा सीएपी के तहत विकल्पों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:

(i) परिशोधन;

(ii) पुनर्संरचना;

(iii) वसूली

अधिक जानकारी के लिए आप दिनांक 17 मार्च 2016 के परिपत्र सं. विसविवि.एमएसएमई एण्ड एनएफएस.बीसी.सं.21/06.02.31/2015-16, को देख सकते हैं।

प्र.18. दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचे की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पुनर्वास और पुनरुद्धार के लिए ढांचा’ के तहत कवर नहीं किए गए एमएसएमई अग्रिमों को बैंकों द्वारा ‘दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचा’ पर दिनांक 7 जून 2019 के परिपत्र बैंविवि.सं.बीपी.बीसी.45/21.04.048/2018-19 में निहित निर्देशों, समय-समय पर किए गए अद्यतन के अनुसार, के अनुरूप पुनर्गठित किया जा सकता है।

प्र.19. एमएसई के लिए उनके एनपीए के निपटान हेतु एकमुश्त निपटान योजना (ओटीएस) पर आरबीआई के दिशानिर्देश क्या हैं?

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को हमारे दिनांक 4 मई 2009 के परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.102/06.04.01/2008-09 के द्वारा सूचित किया गया है कि वे अपने बोर्ड द्वारा विधिवत अनुमोदित एक गैर-विवेकाधीन एकमुश्त निपटान योजना की व्यवस्था करें। बैंकों को यह भी सूचित किया गया है कि वे अपनी ओटीएस नीतियों का पर्याप्त रूप से प्रचार करें।

प्र.20. ऋण और अन्य बैंकिंग सुविधाओं के अलावा, क्या बैंक एमएसई उद्यमियों को कोई अन्य मार्गदर्शन प्रदान करते हैं?

हां, बैंक एमएसई उद्यमियों को निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करते हैं:

(i) ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई)

ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) की पहल पर, पूरे देश में विभिन्न बैंकों द्वारा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) स्थापित किए गए हैं। इन ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों का प्रबंधन बैंकों द्वारा भारत सरकार और राज्य सरकारों के सक्रिय सहयोग से किया जाता है। निरंतर बदलते वैश्विक बाजार में मौजूदा उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी होने में मदद करने के लिए आरएसईटीआई विभिन्न छोटी अवधि (अधिमानतः 1 से 6 सप्ताह तक) के कौशल उन्नयन कार्यक्रम आयोजित करते हैं। आरएसईटीआई यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके द्वारा प्रशिक्षित उम्मीदवारों की एक सूची क्षेत्र की सभी बैंक शाखाओं को भेजी जाए और सरकार द्वारा प्रायोजित किसी भी योजना या प्रत्यक्ष ऋण के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु उनके साथ समन्वय किया जाए।

(ii) वित्तीय साक्षरता और परामर्श सहायता:

बैंकों को सूचित किया गया है कि वे या तो अपनी शाखाओं में अलग से विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करें, या उनके तुलनात्मक लाभ के अनुसार उनके द्वारा स्थापित वित्तीय साक्षरता केंद्रों (एफएलसी) में इस कार्य को सीधे तौर पर एकीकृत करें। इन एफएलसी के माध्यम से, बैंक एमएसई उद्यमियों को वित्तीय साक्षरता, परिचालन कौशल, जिसमें लेखांकन और वित्त, व्यवसाय योजना आदि शामिल हैं, के संबंध में सहायता प्रदान करते हैं (दिनांक 1 अगस्त 2012 परिपत्र ग्राआऋवि.एमएसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.20/06.02.31/2012-13 को देखें)।

साथ ही, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित) द्वारा संचालित वित्तीय साक्षरता केंद्रों को दिनांक 02 मार्च 2017 के हमारे परिपत्र विसविवि.एफएलसी.बीसी.सं.22/12.01.018/2016-17 द्वारा लक्ष्य विशिष्ट वित्तीय साक्षरता शिविर, जिसमें पहचाने गए लक्षित समूहों में से एक एमएसई है, आयोजित करने हेतु सूचित किया गया है।

प्र.21. क्या एमएसई के 'जीवन चक्र' के दौरान समय पर और पर्याप्त ऋण प्रवाह की सुविधा के लिए कोई दिशानिर्देश है?

हां, 'माइक्रो और लघु उद्यमों (एमएसई) को उनके ‘जीवन चक्र’ के दौरान समय पर और पर्याप्‍त ऋण सुविधा देने के लिए ऋण प्रवाह का सरलीकरण’ पर दिनांक 27 अगस्त 2015 के परिपत्र विसविवि.एमएसएमई एण्‍ड एनएफएस.बीसी.सं.60/06.02.31/2015-16 के माध्यम से अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) को दिशानिर्देश जारी किए गए थे।

प्र.22 'माइक्रो और लघु उद्यमों (एमएसई) को उनके ‘जीवन चक्र’ के दौरान समय पर और पर्याप्‍त ऋण सुविधा देने के लिए ऋण प्रवाह का सरलीकरण’ पर जारी दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

उपर्युक्त दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे एमएसई क्षेत्र के लिए अपनी मौजूदा उधार नीतियों की समीक्षा करें और उनमें निम्नलिखित प्रावधान शामिल करें ताकि व्यवहार्य एमएसई उधारकर्ताओं को समय पर और पर्याप्त रूप से, खासकर अप्रत्याशित परिस्थितियों में निधियों की आवश्यकता के दौरान, ऋण की उपलब्धता को सुविधाजनक बनाया जा सके:

(i) मीयादी ऋणों के मामले में आपाती ऋण सुविधा का विस्तार करना

(ii) एमएसई इकाइयों की आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी

(iii) नियमित कार्यशील पूंजी सीमाओं की मध्यावधि समीक्षा, जहां बैंकों को यह विश्वास हो कि एमएसई उधारकर्ताओं के मांग के स्वरूप में परिवर्तनों के कारण पिछले वर्ष की वास्तविक बिक्री के आधार पर प्रति वर्ष एमएसई की मौजूदा क्रेडिट सीमा में वृद्धि की आवश्यकता होती है।

(iv) ऋण निर्णयों के लिए सामयिकता।

प्र.23. ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) क्या है?

टीआरईडीएस का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक बिल फैक्टरिंग एक्सचेंज निर्मित करना है जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से बिलों को स्वीकार और भुगतान करें ताकि एमएसएमई बिना देरी के अपनी प्राप्तियों को भुना सकें। यह न केवल उन्हें वित्त तक अधिक पहुंच प्रदान करेगा बल्कि कॉरपोरेट्स को उनके बकाए का समय पर भुगतान करने के लिए उन्हें और अधिक अनुशासित भी बनाएगा। अधिक जानकारी के लिए आप https://m.rbi.org.in/Scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=3504 पर टीआरईडीएस की स्थापना और संचालन के लिए रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों को देख सकते हैं।

प्र.24. प्रमाणित ऋण सलाहकार (सीसीसी) योजना क्या है?

प्रथम द्वि-मासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2016-17 के पैरा 48 में की गई घोषणा के अनुसार, रिज़र्व बैंक ने ऋण सलाहकारों के आधिकारिक मान्यता के लिए एक रूपरेखा निर्धारित की जिसे परिचालन संबंधी दिशानिर्देश निर्धारित करने के लिए सिडबी के साथ साझा किया गया। तदनुसार, सिडबी द्वारा यह योजना जुलाई 2017 में शुरू की गई थी। योजना के अनुसार, प्रमाणित ऋण सलाहकार सिडबी के साथ पंजीकृत संस्थान या व्यक्ति होते हैं जो पेशेवर तरीके से परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में एमएसएमई की सहायता करते हैं, जो बैंकों को और अधिक प्रामाणिक ऋण निर्णय लेने में मदद करते हैं।


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