मास्टर निदेशों

भारतीय रिज़र्व बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक – लाभांश की घोषणा पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2026

आरबीआई/2025-26/390
विवि.एसीसी.आरईसी.सं.431/21.02.067/2025-26

मार्च 10, 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक – लाभांश की घोषणा पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2026

विषय वस्तु
परिचय
अध्याय I
ए. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ
बी. प्रयोज्यता
सी. परिभाषाएं
अध्याय II – लाभांश की घोषणा
ए. बोर्ड द्वारा निगरानी
बी. पात्रता मानदंड
सी. देय लाभांश की मात्रा
ई. रिपोर्टिंग प्रणाली
एफ. लाभांश के भुगतान के विप्रेषण पर प्रतिबंध
जी. गैर-अनुपालन के लिए दंडात्मक परिणाम
अध्याय III - निरसन और अन्य प्रावधान
ए. निरसन और व्यावृत्ति
बी. अन्य कानूनों के लागू होने पर रोक नहीं
सी. व्याख्याएँ
अनुबंध I
अनुबंध II

परिचय

बैंककारी विनियमन अधिनियम (बीआर अधिनियम), 1949 की धारा 35ए के अधीन प्रदत्त शक्तिर्यों और इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक को सक्षम करने वाली अन्य सभी प्रावधानों / कानूनों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से आश्वस्त होने पर कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक और लाभकारक है, एतद्वारा इसके बाद विनिर्दिष्ट निदेश जारी करता है।

अध्याय I

ए. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ

1. इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक – लाभांश की घोषणा पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2026 कहा जाएगा।

2. ये निदेश वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होंगे।

बी. प्रयोज्यता

3. यह निदेश क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) पर लागू होंगे (इसके बाद सामूहिक रूप से 'बैंकों' और व्यक्तिगत रूप से 'बैंक' कहा जाएगा)।

सी. परिभाषाएं

4. इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इसमें प्रयोग किए गए शब्द नीचे दिए गए अर्थों को व्यक्त करेंगे।

(1) ‘समायोजित कर पश्चात लाभ’ का अर्थ है उस वित्तीय वर्ष के कर पश्चात लाभ से है जिसके लिए लाभांश का भुगतान प्रस्तावित है, में से उस वित्तीय वर्ष के 31 मार्च के निवल एनपीए का 50 प्रतिशत घटाकर प्राप्त राशि;

(2) ‘लाभांश’ का अर्थ इक्विटी शेयरों पर देय लाभांश से है और इसमें अंतरिम लाभांश शामिल है, लेकिन गैर- संचयी असीमित अधिमान शेयरों (पीएनसीपीएस) पर लाभांश शामिल नहीं है; और

(3) ‘असाधारण लाभ / आय’ का वही अर्थ होगा जो लागू लेखांकन मानकों के तहत परिभाषित है।

5. अन्य सभी अभिव्यक्तियों, जब तक कि इसमें परिभाषित ना किया गया हो, उनका वही अर्थ होगा जो उन्हें लागू अधिनियमों/उनके तहत बनाए गए नियमों / विनियमों, या उनमें किसी भी सांविधिक संशोधन या पुनर्नियमन में दिए गए हैं या वाणिज्यिक बोलचाल में प्रयुक्त किया जाता है, जैसा भी मामला हो।

अध्याय II – लाभांश की घोषणा

ए. बोर्ड द्वारा निगरानी

6. बैंक के निदेशक मंडल द्वारा बैंक के लाभांश की घोषणा के प्रस्ताव पर विचार करते समय निम्नलिखित पर विचार किया जाएगा:

(1) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की पर्यवेक्षण टिप्पणियों के तहत पायी गई, अनर्जक आस्तियों (एनपीए) के लिए आस्ति वर्गीकरण और प्रावधानीकरण में अपवर्तन, सहित उसकी प्रवृत्ति;

(2) जिस वित्तीय वर्ष में लाभांश प्रस्तावित है उसके वित्तीय विवरणों पर लेखा परीक्षकों की रिपोर्ट जिसमें परिशोधित राय या मामले पर जोर शामिल है;

(3) लागू विनियामक पूंजी आवश्यकता की तुलना में वर्तमान और अनुमानित पूंजी स्थिति; और

(4) दीर्घकालिक विकास योजनाएं।

बी. पात्रता मानदंड

7. लाभांश की घोषणा करने के लिए पात्र होने हेतु बैंक निम्नलिखित विवेकपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

(1) बैंक पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में लागू विनियामक पूंजी आवश्यकता का अनुपालन कर रहा था और उस वित्तीय वर्ष के अंत में अनुपालन जारी रखेगा जिसके दौरान लाभांश का भुगतान प्रस्तावित है।

(2) लाभांश के भुगतान के बाद भी बैंक की विनियामक पूंजी लागू विनियामक पूंजी आवश्यकता से नीचे नहीं गिरनी चाहिए।

(3) बैंक का वित्तीय वर्ष के लिए सकारात्मक समायोजित कर के बाद लाभ होना चाहिए जिसके लिए लाभांश प्रस्तावित है।

(4) रिज़र्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकरण से लाभांश की घोषणा के लिए बैंक किसी भी स्पष्ट प्रतिबंध तहत नहीं होनी चाहिए।

सी. देय लाभांश की मात्रा

8. कोई बैंक जो उपरोक्त पैरा 7 में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करता है, नीचे दी गई सारणी 1 में निर्धारित सीमाओं तक लाभांश की घोषणा और भुगतान कर सकता है, लेकिन कुल मिलाकर उस अवधि के लिए कर के बाद लाभ के 80% से अधिक नहीं जिसके लिए लाभांश का प्रस्ताव किया जा रहा है।

सारणी 1
बकेट पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में टियर 1 पूंजीगत अनुपात अवधि के लिए समायोजित कर के बाद लाभ के प्रतिशत के रूप में अनुमत लाभांश
बी 1 7% तक 0
बी 2 7% से अधिक और 9% तक 20
बी 3 9% से अधिक और 11% तक 30
बी 4 11% से अधिक और 13% तक 40
बी 5 13% से अधिक और 15% तक 50
बी 6 15% से अधिक और 16% तक 60
बी 7 16% से अधिक और 17% तक 70
बी 8 17% से अधिक और 18% तक 80
बी 9 18% से अधिक और 19% तक 90
बी 10 19% से अधिक 100

9. विस्तृत उदाहरण अनुबंध I में दिए गए हैं।

डी. लाभांश के भुगतान के लिए अपात्र लाभ

10. निम्नलिखित लाभ लाभांश के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं होंगे:

(1) कोई भी असाधारण और / या विशेष लाभ / आय लाभांश के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं होगी।

(2) यदि सांविधिक लेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षित रिपोर्ट में संशोधित राय है जो कर के बाद लाभ के अतिशयोक्ति को दर्शाती है तो जिस सीमा तक कर के बाद लाभ शामिल है उस सीमा तक लाभांश के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं होगी।

(3) भारत सरकार द्वारा गारंटीकृत ऋणों और प्रतिभूति रसीदों के हस्तांतरण के कारण अतिरिक्त प्रावधान को वापस लेना, ऐसे प्रावधानों को वापस लेने पर किसी बैंक द्वारा लाभांश भुगतान या लाभ के विप्रेशन और अवास्तविक लाभ का विवेकपूर्ण उपचार भारतीय रिज़र्व बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक - क्रेडिट जोखिम का अंतरण और वितरण) निदेश, 2025 में निहित अनुदेशों द्वारा निर्देशित होगा।

ई. रिपोर्टिंग प्रणाली

11. लाभांश की घोषणा करने वाला बैंक अनुबंध II में निर्धारित प्रारूप के अनुसार उसका विवरण प्रेषित करेगा। यह रिपोर्ट लाभांश की घोषणा के 14 दिनों (पखवाड़े) के भीतर नाबार्ड के पर्यवेक्षण विभाग को प्रस्तुत की जाएगी।

एफ. लाभांश के भुगतान के विप्रेषण पर प्रतिबंध

12. रिज़र्व बैंक लाभांश के वितरण पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार सुरक्षित रखता है जहाँ कोई बैंक लागू कानूनों, रिज़र्व बैंक द्वारा जारी विनियमों / दिशानिर्देशों का गैर-अनुपालन करता हुआ पाया जाता है।

13. यदि कोई बैंक उपरोक्त पैरा 7 के अनुसार पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करता है, तो उस अवधि के लिए लाभांश की घोषणा हेतु कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी।

जी. गैर-अनुपालन के लिए दंडात्मक परिणाम

14. इन निदेशों में निहित किसी भी प्रावधान का पालन न करने पर लागू पर्यवेक्षी और / या प्रवर्तन कार्रवाई की जा सकती है।

अध्याय III - निरसन और अन्य प्रावधान

ए. निरसन और व्यावृत्ति

15. इन निदेशों के जारी होने से पहले निरस्त किए गए निदेश, अनुदेश और दिशानिर्देश निरस्त ही बने रहेंगे।

16. ऐसे निरसन के बावजूद, निरस्त निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देशों के अंतर्गत की गई या की जाने वाली, या आरम्भ की गई कोई भी कार्रवाई उनके प्रावधानों द्वारा शासित होती रहेगी। इन निरस्त सूचियों के अंतर्गत दिए गए सभी अनुमोदन या अभिस्वीकृतियाँ इन निदेशों द्वारा शासित मानी जाएंगी। इसके अलावा, इन निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देशों को निरस्त करने निम्न पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा:

(1) इसके अंतर्गत अर्जित, उपार्जित या उपगत कोई भी अधिकार, दायित्व या देयता;

(2) इसके अंतर्गत किए गए किसी भी उल्लंघन के संबंध में कोई जुर्माना, जब्ती या दंड; और

(3) किसी भी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व, देयता, जुर्माना, जब्ती, या पूर्वोक्त दंड के संबंध में कोई भी जांच, विधिक कार्यवाही या उपचार; और ऐसी कोई भी जांच, विधिक कार्यवाही या उपचार शुरू किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है या लागू किया जा सकता है और ऐसा कोई भी जुर्माना, जब्ती या दंड लगाया जा सकती है जैसे कि इन निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देश को निरस्त नहीं किया गया हो।

बी. अन्य कानूनों के लागू होने पर रोक नहीं

17. इन निदेशों के प्रावधान वर्तमान में लागू किसी भी अन्य कानून, नियम, विनियम या निदेश के प्रावधानों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके प्रतिकूल।

सी. व्याख्याएँ

18. इन निदेशों के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से या इन निदेशों के प्रावधानों के अनुप्रयोग या व्याख्या में किसी भी कठिनाई को दूर करने के लिए, रिज़र्व बैंक, यदि आवश्यक समझे तो, इसमें शामिल किसी भी मामले के संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण जारी कर सकता है और रिज़र्व बैंक द्वारा इन निदेशों के किसी भी प्रावधान दी गई व्याख्या अंतिम और बाध्यकारी होगी।

(सुनिल टी एस नायर)
मुख्य महाप्रबंधक

2026
2025
2024
2023
2022
2021
2020
2019
2018
2017
2016
2015