आरबीआई/2025-26/387
विवि.एसीसी.आरईसी.सं.427/21.02.067/2025-26
मार्च 10, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – लाभांश की घोषणा और लाभ के विप्रेषण पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2026
परिचय
बैंककारी विनियमन अधिनियम (बीआर अधिनियम), 1949 की धारा 35ए के अधीन प्रदत्त शक्तिर्यों और इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक को सक्षम करने वाली अन्य सभी प्रावधानों / कानूनों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से आश्वस्त होने पर कि ऐसा करना लोकहित में आवश्यक और लाभकारक है, एतद्वारा इसके बाद विनिर्दिष्ट निदेश जारी करता है।
अध्याय I
ए. संक्षिप्त शीर्षक और प्रारंभ
1. इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – लाभांश की घोषणा और लाभ के विप्रेषण पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2026 कहा जाएगा।
2. ये निदेश वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होंगे।
बी. प्रयोज्यता
3. यह निदेश बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 के उप-धारा (सी), (डीए) और (एनसी) के तहत बैंकिंग कंपनियों, संगत नए बैंकों और भारतीय स्टेट तथा शाखा(ओं) के रूप में कार्यरत विदेशी बैंकों पर लागू होंगे जिनमें, लघु वित्त बैंक (एसएफबी), स्थानीय क्षेत्र बैंक (एलएबी), भुगतान बैंक (पीबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) शामिल नहीं, जिन्हें इसके बाद सामूहिक रूप से 'बैंको' और व्यक्तिगत रूप से 'बैंक' कहा जाएगा।
सी. परिभाषाएं
4. इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इसमें प्रयोग किए गए शब्द नीचे दिए गए अर्थों को व्यक्त करेंगे।
(1) ‘समायोजित कर पश्चात लाभ (पीएटी)’ का अर्थ है उस वित्तीय वर्ष के कर पश्चात लाभ (पीएटी) से है जिसके लिए लाभांश का भुगतान प्रस्तावित है, में से उस वित्तीय वर्ष के 31 मार्च के निवल एनपीए का 50 प्रतिशत घटाकर प्राप्त राशि;
(2) ‘लाभांश’ का अर्थ इक्विटी शेयरों पर देय लाभांश से है और इसमें अंतरिम लाभांश शामिल है, लेकिन गैर-संचयी असीमित अधिमान शेयरों (पीएनसीपीएस) पर लाभांश शामिल नहीं है;
(3) ‘असाधारण लाभ / आय’ का वही अर्थ होगा जो लागू लेखांकन मानकों के तहत परिभाषित है; और
(4) ‘लाभ का विप्रेषण’ का अर्थ शाखा मोड में भारत में संचालित विदेशी बैंक द्वारा अपने प्रधान कार्यालय को लाभ का प्रत्यावर्तन।
5. अन्य सभी अभिव्यक्तियों, जब तक कि इसमें परिभाषित ना किया गया हो, उनका वही अर्थ होगा जो उन्हें लागू अधिनियमों / उनके तहत बनाए गए नियमों / विनियमों, या उनमें किसी भी सांविधिक संशोधन या पुनर्नियमन में दिए गए हैं या वाणिज्यिक बोलचाल में प्रयुक्त किया जाता है, जैसा भी मामला हो।
अध्याय II - लाभांश की घोषणा और लाभ विप्रेषण
ए. बोर्ड द्वारा निगरानी
6. बैंक के निदेशक1 मंडल द्वारा बैंक के लाभांश की घोषणा या लाभ विप्रेषण के प्रस्ताव पर विचार करते समय निम्नलिखित पर विचार किया जाएगा:
(1) रिज़र्व बैंक के पर्यवेक्षण टिप्पणियों के तहत पायी गई यदि कोई हो, गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के लिए आस्ति वर्गीकरण और प्रावधानीकरण में अपवर्तन, सहित उसकी प्रवृत्ति;
(2) जिस वित्तीय वर्ष के लिए लाभांश प्रस्तावित है उसके वित्तीय विवरणों पर लेखा परीक्षकों की रिपोर्ट जिसमें परिशोधित राय या मामले पर जोर शामिल है;
(3) लागू विनियामक पूंजी आवश्यकता की तुलना में वर्तमान और अनुमानित पूंजी स्थिति; और
(4) दीर्घकालिक विकास योजनाएं।
बी. पात्रता मानदंड
7. लाभांश की घोषणा करने या लाभ विप्रेषित करने के लिए पात्र होने हेतु बैंक निम्नलिखित विवेकपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
(1) बैंक पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में लागू विनियामक पूंजी आवश्यकता का अनुपालन कर रहा था और उस वित्तीय वर्ष के अंत में अनुपालन जारी रखेगा जिसके दौरान लाभांश का भुगतान प्रस्तावित है।
(2) लाभांश के भुगतान के बाद भी बैंक की विनियामक पूंजी लागू विनियामक पूंजी आवश्यकता से नीचे नहीं गिरनी चाहिए।
(3) भारत में निगमित बैंक का पास उस अवधि के लिए सकारात्मक समायोजित कर के बाद लाभ होना चाहिए जिसके लिए लाभांश प्रस्तावित है।
(4) शाखा मोड में भारत में कार्यरत किसी विदेशी बैंक का उस अवधि के लिए सकारात्मक कर के बाद लाभ होना चाहिए जिसके लिए लाभ प्रधान कार्यालय को प्रेषित किए जाने हैं।
(5) रिज़र्व बैंक या किसी अन्य प्राधिकरण से लाभांश की घोषणा या लाभ विप्रेषण के लिए बैंक किसी भी स्पष्ट प्रतिबंध तहत नहीं होनी चाहिए।
सी. भारत में निगमित बैंकों देय लाभांश की मात्रा
8. भारत में निगमित कोई बैंक जो उपरोक्त पैरा 7 में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करता है, नीचे दी गई सारणी 1 में निर्धारित सीमाओं तक लाभांश की घोषणा और भुगतान कर सकता है, लेकिन कुल मिलाकर उस अवधि के लिए कर के बाद लाभ के 75% से अधिक नहीं जिसके लिए लाभांश का प्रस्ताव किया जा रहा है।
| सारणी 1 |
| बकेट |
पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में सीईटी 1 अनुपात |
अवधि के लिए समायोजित कर के बाद लाभ के प्रतिशत के रूप में अनुमत लाभांश |
| बी 1 |
तक (8 + z)% |
0 |
| बी 2 |
(8 + z)% से अधिक और (10 + z)% तक |
20 |
| बी 3 |
(10 + z)% से अधिक और (12 + z)% तक |
30 |
| बी 4 |
(12 + z)% से अधिक और (14 + z)% तक |
40 |
| बी 5 |
(14 + z)% से अधिक और (16 + z)% तक |
50 |
| बी 6 |
(16 + z)% से अधिक और (17 + z)% तक |
60 |
| बी 7 |
(17 + z)% से अधिक और (18 + z)% तक |
70 |
| बी 8 |
(18 + z)% से अधिक और (19 + z)% तक |
80 |
| बी 9 |
(19 + z)% से अधिक और (20 + z)% तक |
90 |
| बी 10 |
(20 + z)% से अधिक |
100 |
| नोट: सारणी 1 में ‘z’ संबंधित लागू डी-एसआईबी बफर को संदर्भित करता है। डी-एसआईबी के रूप में वर्गीकृत न किए गए बैंक के लिए 'z' शून्य होगा। |
9. विस्तृत उदाहरण अनुबंध I में दिए गए हैं।
डी. शाखा मोड में भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों द्वारा लाभ का विप्रेषण
10. शाखा मोड में भारत में कार्यरत कोई विदेशी बैंक, जो उपरोक्त पैरा 7 में निर्दिष्ट पात्रता मानदंडों को पूरा करता है, अपने भारतीय परिचालन से उत्पन्न व्यवसाय के सामान्य क्रम में अर्जित शुद्ध लाभ / अधिशेष (कर घटाकर) प्रेषित कर सकता है, बशर्ते कि बैंक के खातों का लेखा-परीक्षण किया गया हो और अत्यधिक प्रेषण के मामले में, यदि कोई हो, उस विदेशी बैंक का प्रधान कार्यालय तुरंत अतिरिक्त प्रेषित राशि वापस करेगा और कमी को पूरा करेगा।
ई. शाखा मोड में भारत में संचालित विदेशी बैंकों द्वारा लाभ के विप्रेषण / लाभांश के भुगतान के लिए अपात्र लाभ
11. निम्नलिखित लाभ शाखा मोड में भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों द्वारा लाभ के विप्रेषण / लाभांश के भुगतान के प्रत्यावर्तन के लिए उपलब्ध नहीं होंगे:
(1) भारत में शाखा मोड में कार्यरत विदेशी बैंकों द्वारा लाभ के प्रेषण / लाभांश के भुगतान / के लिए कोई भी असाधारण और / या विशेष लाभ / आय उपलब्ध नहीं होगी।
(2) यदि सांविधिक लेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षित रिपोर्ट में संशोधित राय है जो कर के बाद लाभ के अतिशयोक्ति को दर्शाती है, तो वही भारत में शाखा मोड में संचालित विदेशी बैंकों द्वारा लाभ के प्रेषण / लाभांश के भुगतान के लिए उपलब्ध नहीं होगी, जिस सीमा तक यह कर के बाद लाभ में शामिल है।
(3) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - निवेश पोर्टफोलियो का वर्गीकरण, मूल्यांकन और परिचालन) निदेश, 2025 के अनुसार, कोई बैंक स्तर 3 लिखतों (व्युत्पन्न सहित) के उचित मूल्यांकन पर उत्पन्न होने वाले निवल अवास्तविक लाभ में से लाभांश का भुगतान नहीं करेगा या लाभ का प्रत्यावर्तन नहीं करेगा।
(4) भारत सरकार द्वारा गारंटीकृत ऋणों और प्रतिभूति रसीदों के हस्तांतरण के कारण अतिरिक्त प्रावधान को वापस लेना, ऐसे प्रावधानों को वापस लेने पर किसी बैंक द्वारा लाभांश भुगतान या लाभ के विप्रेशन और अवास्तविक लाभ का विवेकपूर्ण उपचार भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - क्रेडिट जोखिम का अंतरण और वितरण) निदेश, 2025 में निहित अनुदेशों द्वारा निर्देशित होगा।
एफ. रिपोर्टिंग प्रणाली
12. प्रधान कार्यालय को लाभ प्रेषित / लाभांश का भुगतान करने वाला बैंक अनुलग्नक II में निर्धारित प्रारूप के अनुसार उसका विवरण प्रेषित करेगा। यह रिपोर्ट लाभांश की घोषणा / प्रधान कार्यालय को लाभ प्रेषित करने के 14 दिनों (पखवाड़े) के भीतर रिज़र्व बैंक के पर्यवेक्षण विभाग को प्रस्तुत की जाएगी।
जी. लाभांश के भुगतान और लाभ के विप्रेषण पर प्रतिबंध
13. रिज़र्व बैंक लाभांश के वितरण या लाभ के प्रेषण पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार सुरक्षित रखता है जहाँ कोई बैंक लागू कानूनों, रिज़र्व बैंक द्वारा जारी विनियमों / दिशानिर्देशों का गैर-अनुपालन करता हुआ पाया जाता है।
14. यदि कोई बैंक उपरोक्त पैरा 7 के अनुसार पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करता है, तो उस अवधि के लिए लाभांश की घोषणा या लाभ के प्रेषण के लिए कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
एच. गैर-अनुपालन के लिए दंडात्मक परिणाम
15. इन निदेशों में निहित किसी भी प्रावधान का पालन न करने पर लागू पर्यवेक्षी और / या प्रवर्तन कार्रवाई की जा सकती है।
अध्याय III - निरसन और अन्य प्रावधान
ए. निरसन और व्यावृत्ति
16. इस निदेशों के दायरे में आने वाले वाणिज्यिक बैंकों से संबंधित प्रावधानों के संबंध में निरस्त किए गए परिपत्रों की सूची अनुलग्नक III में दी गई है।
17. इन निदेशों के जारी होने से पहले निरस्त किए गए निदेश, अनुदेश और दिशानिर्देश निरस्त ही बने रहेंगे।
18. ऐसे निरसन के बावजूद, निरस्त निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देशों के अंतर्गत की गई या की जाने वाली, या आरम्भ की गई कोई भी कार्रवाई उनके प्रावधानों द्वारा शासित होती रहेगी। इन निरस्त सूचियों के अंतर्गत दिए गए सभी अनुमोदन या अभिस्वीकृतियाँ इन निदेशों द्वारा शासित मानी जाएंगी। इसके अलावा, इन निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देशों को निरस्त करने निम्न पर किसी भी प्रकार से प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा:
(1) इसके अंतर्गत अर्जित, उपार्जित या उपगत कोई भी अधिकार, दायित्व या देयता;
(2) इसके अंतर्गत किए गए किसी भी उल्लंघन के संबंध में कोई जुर्माना, जब्ती या दंड; और
(3) किसी भी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, दायित्व, देयता, जुर्माना, जब्ती, या पूर्वोक्त दंड के संबंध में कोई भी जांच, विधिक कार्यवाही या उपचार; और ऐसी कोई भी जांच, विधिक कार्यवाही या उपचार शुरू किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है या लागू किया जा सकता है और ऐसा कोई भी जुर्माना, जब्ती या दंड लगाया जा सकती है जैसे कि इन निदेशों, अनुदेशों या दिशानिर्देश को निरस्त नहीं किया गया हो।
बी. अन्य कानूनों के लागू होने पर रोक नहीं
19. इन निदेशों के प्रावधान वर्तमान में लागू किसी भी अन्य कानून, नियम, विनियम या निदेश के प्रावधानों के अतिरिक्त होंगे, न कि उनके प्रतिकूल।
सी. व्याख्याएँ
20. इन निदेशों के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से या इन निदेशों के प्रावधानों के अनुप्रयोग या व्याख्या में किसी भी कठिनाई को दूर करने के लिए, रिज़र्व बैंक, यदि आवश्यक समझे तो, इसमें शामिल किसी भी मामले के संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण जारी कर सकता है और रिज़र्व बैंक द्वारा इन निदेशों के किसी भी प्रावधान दी गई व्याख्या अंतिम और बाध्यकारी होगी।
(सुनील टी एस नायर)
मुख्य महाप्रबंधक
अनुबंध III
निरस्त किए गए परिपत्रों की सूची
| क्र.सं. |
परिपत्र संख्या |
जारी करने की तिथि |
विषय |
| 1 |
विवि.एसीसी.आरईसी.87/21-02-067/2025-26 |
28 नवंबर, 2025 |
भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – लाभांश की घोषणा और लाभ के विप्रेषण पर विवेकपूर्ण मानदंड) निदेश, 2025 |
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