मास्टर निदेशों

भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - आंतरिक ओम्बड्समैन) निदेश, 2026

आरबीआई/सीईपीडी/2025-26/384
सीईपीडी.पीआरडी.सं.S1030/13.01.019/2025-26

14 जनवरी 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - आंतरिक ओम्बड्समैन) निदेश, 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 45ठ सपठित धारा 45ड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट होकर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक और उचित है, भारतीय रिज़र्व बैंक, एतद्वारा, निर्दिष्ट निदेश जारी करता है।

ये निदेश गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने तथा ग्राहकों की शिकायतों को अस्वीकार करने से पूर्व एनबीएफसी के अंतर्गत एक शीर्ष स्तरीय प्राधिकारी द्वारा समीक्षा करके शिकायतों का त्वरित और सार्थक समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं।

अध्‍याय I

प्रारंभिक

1. संक्षि‍प्त नाम और प्रारंभ

(1) इन निदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-आंतरिक ओम्बड्समैन) निदेश, 2026 कहा जाएगा।

(2) ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे, सिवाय खंड 7(2), 14(2) और 14(4) के, जिनका अनुपालन 30 जून 2026 तक करना होगा।

2. स्‍थगन

(1) यदि भारतीय रि‍ज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट हो कि सामान्यतया अथवा कि‍सी विशेष विनियमित संस्‍था के मामले में इस योजना के किसी अथवा सभी प्रावधानों का परि‍चालन स्थगि‍त रखना समीचीन है, तो वह एक आदेश द्वारा उक्त आदेश में उल्लि‍खि‍त अवधि‍ के लि‍ए ऐसा कर सकता है।

(2) भारतीय रि‍ज़र्व बैंक, समय-समय पर आदेश के माध्यम से ऊपर नि‍र्दि‍ष्ट कि‍सी स्थगन अवधि‍ को जि‍तना उचि‍त समझे बढ़ा सकता है।

3. प्रयोज्यता

(1) ये निदेश एनबीएफसी (आवास वित्‍त कंपनी, कोर निवेश कंपनी, इंफ्रास्ट्रक्चर कर्ज निधि – गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी, गैर-परिचालनात्मक वित्तीय होल्डिंग कंपनी, प्राथमिक डीलर, बंधक गारंटी कंपनी को छोड़कर) पर लागू होंगे, जैसा कि इन निदेशों के खंड 4(1)(झ) के तहत परिभाषित किया गया है और 31 मार्च 2025 तक निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करते हैं:

  1. 10 या अधिक शाखाओं वाली जमा स्‍वीकार करने वाली एनबीएफसी (एनबीएफसी – डी);

  2. जमा स्वीकार न करने वाली एनबीएफसी (एनबीएफसी-एनडी), जिनका सार्वजनिक ग्राहक इंटरफ़ेस है और जिनकी आस्तियाँ 5,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक हैं;

(2) ये निदेश उन एनबीएफसी पर भी लागू होंगे, जो 31 मार्च 2025 के बाद उपर्युक्त मानदंडों को पूरा करती हैं, तथा ये पात्रता मानदंडों को पूरा करने से छह माह बाद से प्रभावी होंगे।

(3) ये निदेश कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया, परिसमापन/समापन के तहत एनबीएफसी या आरबीआई के निदेशों के तहत एनबीएफसी पर लागू नहीं होंगे।

4. परिभाषाएं

(1) इन निदेशों में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा उल्लेख न किया गया हो, इसमें प्रयुक्त शब्दों का अर्थ नीचे दिए गए अनुसार होगा:

(क) "सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ है एनबीएफसी के कार्यकारी निदेशक / प्रबंध निदेशक / मुख्य कार्यकारी अधिकारी;

(ख) “शिकायत” का अर्थ है लिखित रूप में या अन्य माध्यमों से किया गया ऐसा अभ्‍यावेदन जिसमें एनबीएफसी की ओर से सेवा में हुई कमी का आरोप लगाया गया हो, चाहे उसमें राहत मांगी गई हो या नहीं;

(ग) "प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (सीआइसी)" का अर्थ है कंपनी अधिनियम, 2013 में परिभाषित कंपनी और जिसे प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 5 की उप-धारा (2) के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।

(घ) "ग्राहक" का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो एनबीएफसी द्वारा प्रदान की गई सेवा का उपयोग करता है, अथवा उसके लिए आवेदक है;

(ङ) “सेवा में कमी” का अर्थ एनबीएफसी से वैधानिक रुप से या अन्‍यथा प्रदान करने के लिए अपेक्षित किसी भी सेवा में कमी या अपर्याप्‍तता से है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक को वित्तीय नुकसान या क्षति हो सकती है या नहीं भी हो सकती है;

(च) ‘’उप आंतरिक ओम्बड्समैन (उप आइओ)’’ से आशय इन निदेशों के खंड 6 के तहत नियुक्त किसी भी व्यक्ति से है;

(छ) "वित्तीय क्षेत्र विनियामक निकाय" का अर्थ वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं के लिए विनियामक निकाय है और इसमें शामिल हैं:

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत स्थापित भारतीय रिज़र्व बैंक;

  2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड;

  3. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के तहत स्थापित भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण;

  4. पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण;

(ज) “आंतरिक ओम्बड्समैन (आइओ)” का अर्थ है इन निदेशों के खंड 5 के तहत नियुक्त कोई भी व्यक्ति;

(झ) "विनियमित संस्‍था (आरई)’’ से आशय है, वाणिज्यिक बैंक या भुगतान बैंक या लघु वित्त बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या गैर-बैंक पूर्वदत्त भुगतान लिखत जारीकर्ता या प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी, जो आंतरिक ओम्बड्समैन फ्रेमवर्क के दायरे में आती है, या कोई अन्य संस्था जिसे रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट किया जा सकता है।

(2) अन्य सभी अभिव्यक्तियों का, जब तक कि यहां परिभाषित न किया गया हो, वही अर्थ होगा जो उन्हें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी नियम, 2006, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी विनियमन, 2006, या रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना (समय-समय पर यथा संशोधित), या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी विनियमों, निदेशों और दिशानिर्देशों के तहत उन्हें प्रदत्त किया गया है।

अध्‍याय II

आंतरिक ओम्बड्समैन कार्यालय

5. आंतरिक ओम्बड्समैन की नियुक्ति

(1) आइओ, आंतरिक ओम्बड्समैन फ्रेमवर्क या वित्तीय क्षेत्र विनियामक निकाय के दायरे में आने वाली आरई के महाप्रबंधक के समकक्ष रैंक में एक सेवानिवृत्त या सेवारत अधिकारी होगा, जिसके पास बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणालियों, साख सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने का आवश्यक कौशल और न्यूनतम सात वर्ष का अनुभव होगा;

बशर्ते कि, यदि वह व्यक्ति सेवारत अधिकारी है, तो आइओ के रूप में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व उन्हें अपना पद त्यागना होगा।

(2) आइओ को एनबीएफसी या एनबीएफसी की होल्डिंग, सहयोगी या सहायक कंपनी द्वारा न तो पहले कभी नियोजित किया गया हो, न ही वर्तमान में नियोजित किया गया हो।

(3) कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व आइओ की आयु 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

(4) कोई व्यक्ति संबंधित आरई के विवेकानुसार एक ही समय में एक से अधिक आरई में आइओ के रूप में काम कर सकता है, जो नियुक्त करने वाली आरई के बोर्ड या ग्राहक सेवा समिति/उपभोक्ता संरक्षण समिति के अनुमोदन के अधीन है।

6. उप आंतरिक ओम्बड्समैन की नियुक्ति

(1) उप आइओ, आंतरिक ओम्बड्समैन फ्रेमवर्क या वित्तीय क्षेत्र विनियामक निकाय के दायरे में आने वाली आरई के उप महाप्रबंधक के समकक्ष रैंक में एक सेवानिवृत्त या सेवारत अधिकारी होगा, जिसके पास बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणालियों, साख सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने का आवश्यक कौशल और न्यूनतम पाँच वर्ष का अनुभव होगा;

बशर्ते कि, यदि वह व्यक्ति सेवारत अधिकारी है, तो उप आइओ के रूप में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व उन्हें अपना पद त्यागना होगा।

(2) उप आइओ को एनबीएफसी या एनबीएफसी की होल्डिंग, सहयोगी या सहायक कंपनी द्वारा न तो पहले कभी नियोजित किया गया हो, न ही वर्तमान में नियोजित किया गया हो।

(3) कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व उप आइओ की आयु 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

(4) उप आइओ को एक ही समय में एक से अधिक आरई में नियोजित नहीं किया जाएगा।

7. आंतरिक ओम्बड्समैन/उप आंतरिक ओम्बड्समैन की संख्या

(1) प्रत्येक एनबीएफसी को कम से कम एक आइओ नियुक्त करना होगा।

(2) एनबीएफसी का बोर्ड वर्ष में कम से कम एक बार, आइओ / उप आइओ की संख्या निर्धारित करेगा। प्राप्त शिकायतों की संख्या और जटिलता को ध्यान में रखते हुए आइओ / उप आइओ की नियुक्ति की जाएगी, तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आइओ / उप आइओ को एनबीएफसी द्वारा प्रदान किए गए समाधान की समीक्षा करते समय निष्पक्षता, समानता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय मिले।

(3) अतिरिक्त आइओ / उप आइओ की नियुक्ति करते समय, एनबीएफसी को विभिन्न प्रकार के मामलों से निपटने के लिए पदधारियों के अनुभव की विविधता की आवश्यकता पर विचार करना चाहिए। ऐसे मामलों में, एनबीएफसी प्रत्येक आइओ / उप आइओ के क्षेत्राधिकार को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर सकती है।

8. आंतरिक ओम्बड्समैन / उप आंतरिक ओम्बड्समैन का कार्यकाल

(1) एनबीएफसी में आइओ / उप आइओ की नियुक्ति संविदात्मक होगी।

(2) एनबीएफसी यह सुनिश्चित करेगी कि आइओ / उप आइओ का पद किसी भी समय रिक्त न रहे। आइओ की अस्थायी अनुपस्थिति के दौरान, उप आइओ, आइओ के रूप में कार्य कर सकता है।

(3) ऐसे दुर्लभ मामले में जहाँ आइओ /उप आइओ दोनों छुट्टी पर हों या अनुपस्थित हों, तो एनबीएफसी, बोर्ड के अनुमोदन से, अपने किसी सेवारत अधिकारी को, जो महाप्रबंधक रैंक के समकक्ष हो, एक माह से अनधिक अवधि के लिए आइओ के रूप में नामित कर सकती है। ऐसे अधिकारी का उस अवधि के दौरान एनबीएफसी के व्यावसायिक कार्यक्षेत्रों के साथ रिपोर्टिंग का कोई संबंध नहीं होगा, जिसमें उन्हें आइओ के रूप में नामित किया गया है।

(4) एनबीएफसी में आइओ / उप आइओ का कार्यकाल एक निश्चित अवधि का होगा जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा। हालाँकि, एनबीएफसी में आइओ / उप आइओ का कुल कार्यकाल (विस्तार / पुनर्नियुक्ति सहित, यदि कोई हो) पाँच वर्ष से अधिक नहीं होगा।

(5) रिक्त पद भरने के लिए, एनबीएफसी को वर्तमान आइओ के कार्यकाल की समाप्ति से कम से कम तीन महीने पहले नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि पद छोड़ने वाले आइओ और आने वाले आइओ के कार्यकाल में उचित ओवरलैप हो।

(6) आइओ / उप आइओ को बोर्ड के अनुमोदन के बिना उनकी संविदा अवधि पूर्ण होने से पूर्व नहीं हटाया जाएगा। यदि कोई रिक्ति ऐसे कारणों से उत्पन्न होती है जो एनबीएफसी के नियंत्रण से बाहर हैं (जैसे त्यागपत्र देने, अशक्तता, बीमारी, मृत्यु आदि), तो एनबीएफसी ऐसी रिक्ति की तारीख से 10 कार्य दिवस के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक को सूचित करेगी और इन निदेशों के खंड 5 और खंड 6 के तहत निर्दिष्ट पात्रता मानदंडों के अनुसार रिक्ति की तारीख से तीन माह के भीतर एक नया आइओ / उप आइओ नियुक्त करेगी।

(7) एनबीएफसी का बोर्ड आइओ / उप आइओ को दी जाने वाली परिलब्धियों, सुविधाओं और लाभों की संरचना का निर्धारण करेगा, जो एनबीएफसी के शिकायत निवारण तंत्र के शीर्ष पर रहने वाले व्यक्ति की महत्ता और पद के साथ-साथ अपेक्षित विशेषज्ञता वाले अनुभवी व्यक्तियों को आकर्षित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त होनी चाहिए। आइओ / उप आइओ को मिलने वाली ये परिलब्धियाँ, सुविधाएँ और लाभ, एक बार निर्धारित होने के बाद, आइओ / उप आइओ के कार्यकाल के दौरान प्रतिकूल रूप से परिवर्तित नहीं की जाएंगी।

9. प्रशासनिक निगरानी

(1) प्रशासनिक रूप से आइओ, निदेशों के खंड 4 (1) (क) के तहत परिभाषित अनुसार एनबीएफसी के सक्षम प्राधिकारी को और कार्यात्मक रूप से एनबीएफसी के बोर्ड को रिपोर्ट करेगा।

10. आंतरिक ओम्बड्समैन का सचिवालय

(1) एनबीएफसी आइओ कार्यालय में अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को उतनी संख्या में नियुक्त करेगी, जितनी संख्या आइओ कार्यालय के सुचारू कामकाज के लिए आवश्यक समझी जाएगी।

(2) आइओ / उप आइओ अपनी ज़िम्मेदारियों को अच्छे से और कुशलतापूर्वक पूर्ण कर सकें, इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आइओ के कार्यालय को सूचना प्रौद्योगिकी सहायता सहित कार्यालय संबंधी अन्य सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करायी जाएँगी।

(3) आइओ का कार्यालय मुख्यत: एनबीएफसी के प्रधान कार्यालय या कॉर्पोरेट कार्यालय में रखा जाए।

11. आंतरिक लेखा परीक्षा

(1) एनबीएफसी का आंतरिक लेखा परीक्षा विभाग वार्षिक आधार पर इन निदेशों के कार्यान्वयन की लेखा परीक्षा करेगा, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ शामिल हैं:

(क) आइओ / उप आइओ की नियुक्ति / पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया, आइओ कार्यालय को उपलब्ध कराए गए मानव संसाधन और मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्तता शिकायतों की संख्या के संबंध में;

(ख) आंशिक रूप से हल की गई या पूर्ण रूप से अस्वीकृत की गई शिकायतों को तय समय-सीमा के भीतर आइओ के कार्यालय तक ऑटो-एस्केलेट का कार्यान्वयन;

(ग) शिकायतों के विश्लेषण, भारतीय रिज़र्व बैंक तथा एनबीएफसी को सौंपी गई रिपोर्टों, एनबीएफसी के कर्मचारियों के बीच शिकायत निवारण प्रक्रियाओं तथा ऐसी अन्य प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के संबंध में आइओ कार्यालय द्वारा की जाने वाली कार्रवाई;

(घ) आइओ / उप आइओ की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी और एनबीएफसी द्वारा आइओ के कामकाज पर आवधिक रिपोर्ट रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करना।

(2) आंतरिक लेखा परीक्षा के दायरे में आइओ / उप आइओ द्वारा लिए गए निर्णयों की शुद्धता के किसी भी मूल्यांकन को शामिल नहीं किया जाएगा।

अध्याय – III

भूमिका और जिम्मेदारियाँ

12. आंतरिक ओम्बड्समैन / उप आंतरिक ओम्बड्समैन की भूमिका और जिम्मेदारियाँ

(1) शिकायतकर्ताओं या आम जनता से सीधे प्राप्त होने वाली शिकायतों को आइओ कार्यालय द्वारा संचलित नहीं किया जाएगा। यह उन शिकायतों पर कार्रवाई करेगा जिनकी एनबीएफसी द्वारा पहले ही जांच कर ली गई है, लेकिन एनबीएफसी द्वारा उनका आंशिक समाधान किया गया है या पूर्ण रूप से खारिज कर दिया गया है।

(2) विधिक मामलों में आइओ/उप आइओ किसी भी न्यायालय, मंच या प्राधिकरण के समक्ष एनबीएफसी का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।

(3) हालांकि आइओ किसी भी या सभी शिकायतों पर निर्णय ले सकते हैं, लेकिन शिकायतों पर निर्णय लेने की उप आइओ की शक्ति बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के तहत तय की जा सकती है।

(4) आइओ / उप आइओ शिकायतकर्ता को उचित मुआवजा देने की सिफारिश करेंगे, जो भारतीय रिज़र्व बैंक के मौजूदा दिशानिर्देशों, यदि कोई हों, में निर्धारित मुआवजे के अनुसार होगा, और यदि भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से कोई निर्देश नहीं है, तो एनबीएफसी की मुआवजा नीति, यदि कोई हो, के अनुसार होगा।

(5) आइओ, शिकायतकर्ता को हुए किसी परिणामी नुकसान तथा समय की हानि, हुए व्यय तथा उत्पीड़न / मानसिक पीड़ा के लिए धारा 12(4) में अनुशंसित मुआवजे के अतिरिक्त समय-समय पर यथा संशोधित रिज़र्व बैंक ओम्बड्समैन योजना के अनुसार मुआवजे की सिफारिश कर सकते हैं।

(6) आइओ कार्यालय, एनबीएफसी के विरूद्ध प्राप्त सभी शिकायतों के पैटर्न का विश्लेषण तिमाही आधार पर करेगा, जैसे उत्पाद-वार, श्रेणी-वार, उपभोक्ता समूह-वार, भौगोलिक स्थान-वार आदि, और यदि आवश्यक हो तो नीतिगत हस्तक्षेप के लिए एनबीएफसी को इनपुट प्रदान करेगा।

(7) आइओ ऐसी शिकायतों के मूल कारण को दूर करने के लिए कार्रवाई के उपाय सुझाएगा जो एक जैसी या बार-बार होने वाली प्रकृति की हों, और जिनमें एनबीएफसी स्तर पर नीतिगत बदलाव की आवश्यकता हो।

(8) आइओ / उप आइओ के पास रिज़र्व बैंक की शिकायत प्रबंध प्रणाली का ‘रीड-ओनली’ एक्सेस होगा, ताकि वे आरबीआई ओम्बड्समैन / अपीलीय प्राधिकारी के निर्णयों से अवगत हो सकें। एनबीएफसी, आइओ / उप आइओ के लिए, रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग से ऐसा एक्सेस सुविधा प्राप्त करेगी।

(9) उप आइओ कार्यात्मक रूप से आइओ को रिपोर्ट करेंगे।

13. बोर्ड निरीक्षण

(1) आइओ को बोर्ड की बैठकों के लिए स्थायी आमंत्रित व्यक्ति के रूप में नामित किया जाएगा। जिन एनबीएफसी में कई आइओ हैं, उनमें बोर्ड यह विचार करेगा कि एक से ज्यादा आइओ का प्रतिनिधित्व हो या रोटेशन की व्यवस्था हो।

(2) आइओ बोर्ड को अपनी गतिविधियों की आवधिक रिपोर्ट (शिकायतों के विश्लेषण सहित) प्रस्तुत करेंगे, जो मुख्यत: तिमाही अंतराल पर होगी, लेकिन छमाही अंतराल से कम नहीं।

(3) आइओ / उप आइओ द्वारा लिए गए निर्णय को केवल इन निदेशों के खंड 4(1)(क) के तहत परिभाषित सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से ही नामंजूर किया जा सकता है।

(4) ऐसे सभी मामले, जिनमें सक्षम प्राधिकारी द्वारा आइओ / उप आइओ के निर्णय को नामंजूर कर दिया गया है, उन्हें एनबीएफसी के बोर्ड के समक्ष समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

(5) आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में आंशिक या पूर्ण रूप से हल की गई शिकायतों की जानकारी तिमाही आधार पर बोर्ड के समक्ष भी रखी जाएगी। सूचना के साथ शिकायतों की कम से कम प्रमुख पांच श्रेणियों का विश्लेषण और उनके उपचारात्मक उपाय भी प्रस्तुत किए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतों से बचा जा सके।

अध्‍याय – IV

एनबीएफसी के लिए प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश

14. आंतरिक ओम्बड्समैन / उप आंतरिक ओम्बड्समैन द्वारा शिकायत निवारण की प्रक्रिया

(1) एनबीएफसी द्वारा एक पूर्णत: ऑटोमेटेड शिकायत प्रबंध प्रणाली स्थापित की जाएगी और आइओ / उप आइओ को इस प्रणाली का एक्सेस प्रदान करेगा । एनबीएफसी की आंतरिक शिकायत निवारण व्यवस्था द्वारा आंशिक रूप से हल की गई या पूर्णत: अस्वीकार की गई सभी शिकायतें समीक्षा के लिए आइओ कार्यालय में ऑटो-एस्केलेट कर दिया जाएगा।

क) ऐसी शिकायतों के मामले में, जिनके समाधान के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम या कार्ड नेटवर्क के दिशानिर्देशों में समयसीमा निर्धारित है, तो उन्हें काफी पहले आइओ / उप आइओ को भेजें ताकि समीक्षा के लिए कम से कम 10 दिन का समय मिल सके, जिससे अंतिम निर्णय की सूचना शिकायतकर्ताओं को भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम या कार्ड नेटवर्क द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर दी जा सके;

ख) अन्य मामलों में प्राप्ति के 20 दिन के भीतर।

(2) आइओ कार्यालय में शिकायतों को बढ़ाने से पहले एनबीएफसी को उन शिकायतों पर हुए निर्णय को रिकॉर्ड करने के लिए अपनी शिकायत प्रबंध प्रणाली में केवल तीन श्रेणियाँ अर्थात ‘पूर्णत: समाधान’, ‘आंशिक रूप से समाधान’ और ‘पूर्णत: अस्वीकृत’ उपलब्ध करानी होगी। खंड 14(5)(ग) से 14(5)(ङ) के तहत आइओ / उप आइओ के दायरे से बाहर की शिकायतों को इस तरह के वर्गीकरण से छूट प्रदान की गई है।

(3) शिकायतों और जानकारी के समयबद्ध प्रवाह के लिए एनबीएफसी एक मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाएगी।

(4) एनबीएफसी यह सुनिश्चित करेगी कि शिकायत उसी शाखा / यूनिट / अन्य संपर्क बिंदु द्वारा बंद न की जाएं, चाहे उसका समाधान हो गया हो (पूर्णत: या आंशिक रूप से) या अस्वीकार कर दी गई हो। जिस शिकायत को पूर्णत: अस्वीकार किया जा रहा है या जिनका आंशिक समाधान किया जा रहा है, उन्हें आइओ कार्यालय में भेजने से पूर्व, वरिष्ठ स्तर पर, जैसा एनबीएफसी उचित समझे, उनकी समीक्षा की जाएगी।

(5) निम्नलिखित प्रकार की शिकायतें इन निदेशों के दायरे से बाहर होंगी और आइओ / उप आइओ द्वारा उन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी:

क) एनबीएफसी की ओर से कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, दुर्विनियोजन से संबंधित शिकायतें, जो ग्राहक को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करती हैं;

ख) संदर्भ जो सुझावों और एनबीएफसी के वाणिज्यिक निर्णय की प्रकृति के हों। हालांकि, 'वाणिज्यिक निर्णयों' के अंतर्गत आने वाले मामलों में सेवा की कमी आइओ कार्यालय के लिए वैध शिकायतें होंगी।

ग) (i) आंतरिक प्रशासन, (ii) मानव संसाधन या (iii) एनबीएफसी के कर्मचारियों के वेतन और परिलब्धियों से संबंधित शिकायतें/संदर्भ;

घ) ऐसी शिकायतें जो किसी अन्य मंच जैसे न्यायालय, उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मध्यस्थता आदि द्वारा पहले ही निर्णीत हैं या उनमें लंबित हैं।

ङ) विवाद जिनके लिए प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 18 के तहत समाधान प्रदान किया गया है।

एनबीएफसी उपरोक्त श्रेणियों (क) और (ख) के अंतर्गत अस्वीकृत / आंशिक रूप से हल की गई शिकायतों को आइओ / उप आइओ को अग्रेषित करेगा, जो ऐसे मामलों में सेवा में अंतर्निहित कमियों की जांच करेंगे और यह देखेंगे कि क्या इनमें से किसी शिकायत पर एनबीएफसी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार उपरोक्त (क) और/या (ख) के अंतर्गत छूट के योग्य है। इन निर्देशों के दायरे से बाहर की शिकायतें आइओ / उप आइओ द्वारा तुरंत एनबीएफसी को वापस कर दी जाएंगी।

(6) आइओ / उप आइओ एनबीएफसी के पास उपलब्ध अभिलेख के आधार पर शिकायतों की जांच करेंगे, जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए किसी भी दस्तावेज और आइओ के विशिष्ट प्रश्नों के संबंध में एनबीएफसी द्वारा प्रस्तुत टिप्पणियां / स्पष्टीकरण शामिल हैं।

(7) आइओ / उप आइओ, एनबीएफसी के संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकें कर सकते हैं और एनबीएफसी के पास मौजूद कोई भी अतिरिक्त अभिलेख / दस्तावेज की मांग कर सकते हैं, जो शिकायत की जांच करने और निर्णय की समीक्षा के लिए आवश्यक हों।

(8) यदि आइओ / उप आइओ को आवश्यक लगे, तो वे सचिवालय के माध्यम से शिकायतकर्ता से लिखित या मौखिक प्रस्तुति (अतिरिक्त जानकारी और दस्तावेजों सहित) की मांग कर सकते हैं।

(9) एनबीएफसी यह सुनिश्चित करेगी कि शिकायत प्राप्त होने की तारीख से 30 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को अंतिम निर्णय भेज दिया जाए।

(10) आइओ / उप आइओ प्रत्येक मामले में एक “तर्कसंगत निर्णय” दर्ज करेंगे।

(11) जहां आइओ / उप आइओ शिकायत को अस्वीकृत करने या आंशिक रूप से हल करने के एनबीएफसी के निर्णय को बरकरार रखते हैं, वहां शिकायतकर्ता को दिए गए जवाब में साफ तौर पर यह बताया जाना चाहिए कि आइओ / उप आइओ द्वारा उस शिकायत की समीक्षा की गई है।

(12) आइओ / उप आइओ द्वारा जांच के बाद आंशिक रूप से हल की गई या पूर्णत: अस्वीकार की गई शिकायतों के मामले में, एनबीएफसी शिकायतकर्ता को शिकायत के पूर्ण विवरण के साथ, भारतीय रिज़र्व बैंक ओम्बड्समैन से निवारण हेतु संपर्क (समय-समय पर यथा संशोधित रिज़र्व बैंक एकीकृत ओम्बड्समैन योजना के अंतर्गत शामिल नहीं होने वाली शिकायतों को छोड़कर) करने के विकल्प के बारे में सूचित करेगा। एनबीएफसी अपने उत्तर में केंद्रीकृत प्राप्ति और प्रसंस्करण केंद्र1 के भौतिक पते / ईमेल के साथ-साथ ग्राहकों की शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करने के लिए रिज़र्व बैंक के शिकायत प्रबंध प्रणाली पोर्टल के यूआरएल (https://cms.rbi.org.in) का उल्लेख भी करेगा।

(13) जब कोई शिकायत आरबीआई ओम्बड्समैन को भेज दी जाती है, और यदि शिकायत की समीक्षा आइओ / उप आइओ द्वारा पहले ही की जा चुकी है, तो एनबीएफसी द्वारा आरबीआई ओम्बड्समैन को दी गई जानकारी में आइओ / उप आइओ का निर्णय अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। यदि आरबीआई ओम्बड्समैन से प्राप्त शिकायत की समीक्षा आइओ / उप आइओ द्वारा पहले नहीं की गई है, तो एनबीएफसी को आवश्यक रूप से उनकी टिप्पणियाँ लेनी होंगी और उन्हें आरबीआई ओम्बड्समैन को प्रस्तुत करना होगा।

(14) शिकायतों के निपटान में एकरूपता लाने के लिए आइओ द्वारा निपटाई गई शिकायतों के विश्लेषण का उपयोग एनबीएफसी अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों / सम्मेलनों में अपने फ्रंटलाइन कर्मचारियों के बीच मूल कारणों, उपचारात्मक उपायों आदि सहित शिकायतों के पैटर्न के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए करेगी। जहां आवश्यक हो, ऐसे प्रशिक्षणों में आइओ / उप आइओ को शामिल किया जा सकता है।

(15) आइओ / उप आइओ के कार्य-निष्पादन का आंकलन करते समय, लंबित मामलों के स्तर और शिकायतों के निवारण में एनबीएफसी में एकरूपता विकसित करने की दिशा में आइओ / उप आइओ द्वारा किए गए कार्यों के अलावा, बोर्ड उन मामलों की संख्या का भी विश्लेषण करेगा जहां आइओ / उप आइओ द्वारा दिए गए निर्णयों की तुलना में आरबीआई ओम्बड्समैन द्वारा दिए गए निर्णयों के बीच बड़ा अंतर है।

(16) संगठन (सभी शाखाओं और प्रशासनिक कार्यालयों) में आइओ की नियुक्ति के संबंध में सूचना प्रदान करते समय एनबीएफसी अपने कर्मचारियों के बीच इन निदेशों के संबंध में दिशानिर्देशों / अनुदेशों का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करेगी।

(17) एनबीएफसी आइओ / उप आइओ का संपर्क विवरण सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं कराएगी क्योंकि आइओ / उप आइओ सीधे ग्राहकों से प्राप्त शिकायतों को संचलित नहीं करेंगे।

अध्याय - V

रिज़र्व बैंक द्वारा विनियामक और पर्यवेक्षी निगरानी

15. पर्यवेक्षी निगरानी

(1) ग्राहक सेवा और ग्राहक शिकायत निवारण से संबंधित क्षेत्र, साथ ही इन निदेशों का कार्यान्वयन, रिज़र्व बैंक के पर्यवेक्षण विभाग द्वारा पर्यवेक्षी समीक्षा का एक हिस्सा होंगे।

(2) रिज़र्व बैंक का उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग उन मामलों की समीक्षा कर सकता है जहाँ आइओ / उप आइओ के निर्णय को एनबीएफसी द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है और पीड़ित शिकायतकर्ता रिज़र्व बैंक के ओम्बड्समैन से संपर्क करता है, ताकि एनबीएफसी के आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके और उचित समझे जाने वाले सुधारात्मक उपाय किए जा सकें।

16. रिज़र्व बैंक को रिपोर्टिंग

(1) एनबीएफसी, आइओ या उप आइओ की नियुक्ति के पाँच कार्य दिवस के भीतर, नियुक्त अधिकारी का विवरण निम्न प्रारूप में उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक (ईमेल: iocepd@rbi.org.in) को प्रेषित करेगी:

1. आइओ / उप आइओ का नाम  
2. अंतिम धारित पदों / संगठन का विवरण  
3. नियुक्ति / पुनर्नियुक्ति की तिथि  
4. जन्मतिथि  
5. अवधि (वर्ष में)  
6. संक्षिप्त पेशेवर प्रोफ़ाइल, जिसमें वित्तीय सेवाओं का पिछला अनुभव शामिल है, जो उन बिंदुओं पर प्रकाश डालता हो जो उन्हें नियुक्ति के लिए पात्र बनाते हैं  
7. संपर्क विवरण (टेलीफोन, ईमेल, पता)  
8. रिज़र्व बैंक को सूचित करने की तिथि  

(2) एनबीएफसी अनुबंध में दिए गए प्रारूप के अनुसार तिमाही आधार पर उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक को सूचना की आवधिक रिपोर्टिंग हेतु एक प्रणाली स्थापित करेगी। ये रिपोर्ट उस तिमाही, जिसके लिए वह देय है, के अगले माह के 15वें दिन या उससे पूर्व प्रस्तुत की जाएगी।

अध्याय - VI

निरसन प्रावधान

17. मौजूदा योजनाओं का निरसन

(1) इन निदेशों के जारी होने के साथ, रिज़र्व बैंक द्वारा 29 दिसंबर 2023 को जारी मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (विनियमित संस्थाओं के लिए आंतरिक ओम्बड्समैन) निदेश, 2023 निरस्त हो गया है।

(2) इन निदेशों के प्रभावी होने से पूर्व उपर्युक्त मास्टर निदेश के तहत सभी नियुक्तियाँ / कार्रवाई इन निदेशों के अधीन की गई मानी जाएंगी।

(डॉ. नीना रोहित जैन)
मुख्य महाप्रबंधक


1 केंद्रीकृत प्राप्ति और प्रसंस्करण केंद्र (सीआरपीसी) भारतीय रिज़र्व बैंक, सेंट्रल विस्टा, सेक्टर 17, चंडीगढ़- 160 017, (email: crpc@rbi.org.in)

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