आरबीआई/DCM/2026-27/473
DCM(NPD) No.S2154/18.00.014/2026-27
2 अक्टूबर, 2026
अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक / मुख्य कार्यकारी अधिकारी
सभी बैंक
महोदया/महोदय,
नोट सॉर्टिंग मशीन संबंधी मास्टर दिशा-निदेश
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A और धारा 56 के तहत प्रदत्त अधिकार के अंतर्गत, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर नोट सॉर्टिंग मशीन को लेकर विनियमित ईकाईयों हेतु विभिन्न दिशा-निदेश / परिपत्र / निर्देश जारी किए गए हैं।
2. इस विषय पर मौजूदा दिशा-निदेश/ परिपत्र / निर्देशों को समेकित कर व इसे अद्यतित करते हुए संलग्न मास्टर निदेश तैयार किया गया है, जिससे बैंक, नोट सॉर्टिंग मशीन से संबंधित सभी अनुदेश एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकें
3. इस मास्टर दिशा-निदेश के जारी होने की तिथि से इस विषय से संबंधित पूर्ववर्ती सभी परिपत्र (संलग्न) अप्रासंगिक हैं।
भवदीय,
(संजीव प्रकाश)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक
संलग्नक: यथोक्त
नोट सॉर्टिंग मशीन संबंधी मास्टर दिशा-निदेश
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A और धारा 56 के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जनहित के लिए आवश्यक और अपरिहार्य समझे जाने के आधार पर उक्त धारा के अंतर्गत निम्नलिखित निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
1. परिचय
बैंक नोटों की सॉर्टिंग / प्रोसेसिंग के लिए नोट सॉर्टिंग मशीनों (Note Sorting Machines – NSM) के उपयोग संबंधी दिशा-निदेश दिनांक 19 नवंबर, 2009 के परिपत्र संख्या DCM. No. Cir. NPD.3161/09.39.00 (Policy) / 2009-2010 के माध्यम से जारी किए गए थे, जिसके अंतर्गत बैंकों को सूचित किया गया था कि ये मशीनें रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए जाने वाले मानकों / पैरामीटर के अनुरूप हों। इसके पश्चात्, 2009 के दौरान (23 दिसंबर, 2009) प्रकाशित ‘’नोट प्रमाणीकरण एवं फिटनेस सॉर्टिंग मापदंड (Note Authentication and Fitness Sorting Parameters) विषयक मसौदा दिशा-निर्देशों के संबंध में बैंकों, उपकरण निर्माताओं तथा नागरिकों को शामिल करते हुए विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए, ‘’नोट प्रमाणीकरण एवं फिटनेस सॉर्टिंग मापदंड विषयक अंतिम दिशा-निदेश दिनांक 11 मई, 2010 के परिपत्र संख्या DCM(R&D) No.G-26 /18.00.14/2009-10 के माध्यम से जारी किए गए। तत्पश्चात्, नई श्रेणी के बैंकनोटों की शुरुआत की पृष्ठभूमि में इन मापदण्डों की समीक्षा की गई, और दिनांक 01 जुलाई, 2022 के परिपत्र संख्या DCM(NPD) No. S488/18.00.14/2022-23 के माध्यम से बैंकों को संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए।
2. नोट प्रमाणीकरण और फिटनेस सॉर्टिंग मानकों पर दिशा-निदेश
2.1 एक उपयुक्त बैंक नोट, ऐसा नोट है जो वास्तविक है, पर्याप्त रूप से स्वच्छ है जिससे इसके मूल्यवर्ग का आसानी से पता लगाया जा सके और इस प्रकार पुनर्चक्रण के लिए उपयुक्त हो। एक अनुपयुक्त (अनफिट) नोट एक ऐसा नोट है जो अपनी भौतिक स्थिति के कारण पुनर्चक्रण के लिए उपयुक्त नहीं है या किसी ऐसी श्रृंखला से संबंधित है जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा चरणबद्ध रूप से समाप्त कर दिया गया है। इस दस्तावेज़ में निर्धारित सभी फिटनेस मानकों का व्यक्तिगत रूप से मूल्यांकन किया जाएगा। एक नोट को पुनर्चक्रण के लिए उपयुक्त माने जाने वाले सभी फिटनेस मानकों में सफल होना होगा।
2.2 ये मानक बैंकों द्वारा नकदी के लिए उपयोग में लिए जाने वाले मशीनों (इसके उपरांत 'मशीन' के रूप में संदर्भित) हेतु न्यूनतम मानक प्रदान करते हैं। नोटों को केवल तभी पुनर्चक्रित/पुनर्निर्गम किया जा सकता है जब उनका मूल्यांकन इन मानकों के अनुसार वास्तविक और उपयुक्त की श्रेणी में किया गया हो। फिटनेस सॉर्टिंग के लिए प्रामाणिकता जांच प्राथमिक आवश्यकता है। फिटनेस सॉर्टिंग केवल वास्तविक नोटों के मामले में ही की जा सकती है। मशीनें विश्वसनीय और सुसंगत तरीके से संदिग्ध जाली नोटों और ऐसे नोटों, जो इन मानकों के अनुसार संचलन के लिए अनुपयुक्त हैं, को पहचानने और विलग करने में सक्षम होंगी।
2.3 भारतीय रिज़र्व बैंक समय-समय पर कुछ निश्चित श्रृंखला के नोटों को संचलन से वापस लेता है। यद्यपि ये नोट, जब तक कि अन्यथा निर्दिष्ट, पुन: जारी करने के लिए अनुपयुक्त न हो, वैध मुद्रा माने जाते हैं। जब कभी भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक नोटों के एक विशिष्ट मूल्यवर्ग की विशेष श्रृंखला को संचलन से वापस लेने का निर्णय लेता है, तो मशीनें सभी हटाए जाने वाले नोटों को उनकी वास्तविक स्थिति पर विचार किए बिना अनुपयुक्त के रूप में वर्गीकृत करेगी।
3. प्रयोज्यता
ये मानक बैंकों द्वारा संचालित उन मशीनों पर लागू होते हैं, जो या तो सीधे उनके कर्मचारियों द्वारा या परोक्ष रूप से उनके एजेंटों द्वारा उपयोग में ली जा रही हैं। ये मशीनें निम्नलिखित में से कोई भी हो सकती हैं:
-
वे मशीनें जो नोटों की प्रामाणिकता और फिटनेस की जांच करती हैं, अर्थात नोट प्रसंस्करण मशीन / नोट सॉर्टिंग मशीन, तथा
-
वे मशीनें जो केवल नोटों की प्रामाणिकता की जांच करती हैं, अर्थात नोट प्रमाणीकरण मशीनें और एक –एक नोट को वास्तविक या संदिग्ध के रूप में वर्गीकृत करती हैं।
4. प्रामाणिकता जांच
ये मशीनें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर आरबीआई वेबसाइट पर निरूपित वास्तविक नोटों की विशेषताओं के आधार पर प्रामाणिकता जांच करेंगी। कोई भी बैंक नोट जिसमें वास्तविक नोट की सभी विशेषताएं मौजूद नहीं हैं तो उसे मशीन द्वारा संदिग्ध/अस्वीकृत के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
5. फिटनेस सॉर्टिंग
फिटनेस सॉर्टिंग के कार्य के रूप में, किसी भी विजुअल या भौतिक तौर पर विरूपित नोटों को सारणी 1 में निर्धारित मानकों के अनुसार अनुपयुक्त के रूप में श्रेणीबद्ध किया जाएगा।
| सारणी 1: सॉर्टिंग मानदंड |
| क्र. सं. |
विशेषताएँ |
मानदंड |
| 1 |
सॉइलिंग |
पूरे नोट में गंदगी का सामान्य वितरण |
| 2 |
लिंपनैस |
संरचनात्मक ह्रास, जिसके परिणामस्वरूप कठोरता का बहुत अभाव हो जाता है |
| 3 |
डॉग-ईयर्स |
कोने मुड़े हुए |
| 4 |
टियर्स (कटे हुए) |
लंबाई और क्रॉसवाइज कट |
| 5 |
होल्स |
एक विशिष्ट व्यास के छिद्र |
| 6 |
धब्बे |
गंदगी का स्थानबद्ध संकेन्द्रण |
| 7 |
ग्रैफिटी (भित्तिचित्र) |
नोट का जानबूझकर ग्राफिक परिवर्तन |
| 8 |
क्रंपल्स (टूटे/मुड़े हुए) |
एकाधिक यादृच्छिक मुड़े हुए/ नोट की लंबाई या चौड़ाई को कम करने वाले फोल्ड |
| 9 |
डीकलरेशन (विरंजन) |
नोट के हिस्से या पूरे हिस्से पर स्याही का अभाव, जैसे- एक धुला हुआ नोट |
| 10 |
रिपेयर (सुधारना) |
चिपकने वाला टेप/कागज/गोंद का उपयोग करके सुधारे गए नोट |
(i) सॉइलिंग
सॉइलिंग, पूरे नोट में या कुछ पैटर्न में गंदगी के सामान्य फैलाव को दर्शाता है। यह गंदगी, ज्यादा उपयोग(पीलापन), घिसने और बाहरी निशानों के कारण नोटों के छपाई-रहित हिस्से से प्रतिबिंबित कम होने का एक मापक है और इसमें अत्यधिक उपयोग, अत्यधिक मोड़ने-समेटने और अन्य तरीके से घिसने के कारण फीका होना शामिल है। बैंक नोटों के गंदे होने से उसके ऑप्टिकल डेन्सिटी में वृद्धि होती है और नोटों का रिफ्लेक्शन कम होता है। सारणी 2 में निर्धारित गंदगी के स्तर से अधिक की स्थिति में नोटों को अनुपयुक्त के रूप में श्रेणीबद्ध किया जाएगा। गंदे नोट के रूप में वर्गीकृत करने के पूर्व बैंक नोट अग्र व पश्च दोनों हिस्सों की जांच की जाएगी।
| सारणी 2: Soiling Levels |
| क्र. सं. |
मूल्यवर्ग |
अधिकतम घनत्व अंतर |
न्यूनतम परावर्तन |
| 1 |
₹5 |
0.07 |
85% |
| 2 |
₹10 |
0.07 |
85% |
| 3 |
₹20 |
0.06 |
87% |
| 4 |
₹50 |
0.06 |
87% |
| 5 |
₹100 |
0.05 |
90% |
| 6 |
₹200 |
0.05 |
90% |
| 7 |
₹500 |
0.04 |
93% |
(ii) लिंपनैस
लिंपनैस संरचनात्मक ह्रास या घिसने से संबंधित है जिसके परिणामस्वरूप नोट पेपर में कठोरता का बहुत अभाव हो जाता है। कागज की बहुत कम कठोरता वाले नोट, अर्थात कागज सहित जो प्रचलन में खराब हो गए हैं या यंत्रवत् रूप से कटे-फटे हैं, उन्हें अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा। कागज की गुणवत्ता के लिए डिटेक्टरों को उसी स्तर पर अनुकूलित किया जाना चाहिए जैसे कि गंदे नोट के लिए किया जाता है।
(iii) डॉग-ईयर
100 मिमी² से अधिक क्षेत्र के डॉग-ईयर वाले बैंकनोट और 5 मिमी से अधिक छोटे किनारे की न्यूनतम लंबाई को अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा। चिपके हुए नोटों को भी अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा।
(iv) टियर्स (कटे हुए)
किनारे पर कम से कम एक कट प्रदर्शित करने वाले नोटों को उन नोटों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा जिनमें कट हैं। सारणी 3 में दर्शाए गए कट से बड़े कट वाले नोटों को अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा।
| सारणी 3: टियर्स (कटे हुए) |
| क्र. सं. |
दिशा |
चौड़ाई |
लंबाई |
| 1 |
वर्टिकल |
4 mm |
8 mm |
| 2 |
हॉरिजॉन्टल |
4 mm |
15 mm |
| 3 |
तिरछा * |
4 mm |
18 mm |
| * कट की लंबाई को मापने के बजाय, जहां से नोट का काटा हुआ भाग शुरू होता है, उस कट की चोटी से नोट के किनारे तक (आयताकार प्रक्षेपण) एक सीधी रेखा खींचकर मापा जाता है। |
(v) होल्स
यह कम से कम एक दृश्य छिद्र वाले नोटों को संदर्भित करता है। 8 मिमी² से अधिक क्षेत्रफल के छिद्र वाले नोटों को अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा।
(vi) धब्बे
धब्बे दिखाई देने वाले वे निशान होते हैं जो किसी नोट की विशेषता का हिस्सा नहीं होते हैं। यदि स्थानबद्ध – अर्थात सीमित विस्तार के साथ - इसकी सतह पर धब्बों को देखा जा सकता है तो उन नोटों की पहचान अनुपयुक्त के रूप में की जाएगी। यदि कुल 500 मिमी² से अधिक क्षेत्र धब्बों से कवर है, तो नोट को अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा। 200 मिमी² से अधिक के क्षेत्र को कवर करने वाले एकल धब्बे वाले नोट को अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा। धब्बों के लिए नोट के आगे और पीछे दोनों की जाँच की जानी चाहिए।
(vii) ग्रैफिटी (भित्तिचित्र)
ग्रैफिटी, जैसे जानबूझकर आंकड़े या अक्षरों के साथ नोट के ग्राफिक परिवर्तन को संदर्भित करता है।गैर-स्थायी चिह्न जैसे पेंसिल के खुरचे हुए निशान, जो बैंकनोट के विषय को छिपाते नहीं हैं और परावर्तन और ऑप्टिकल घनत्व के मानदंडों को पास करते हैं, उन्हें अनुपयुक्त के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है। ग्रैफिटी के मामले में फिटनेस सॉर्टिंग मानक धब्बों के समान ही होंगे। ग्रैफिटी के लिए नोट के आगे और पीछे दोनों की जाँच की जानी चाहिए।
(viii) क्रंपल्स/फोल्ड्स (टूटे/मुड़े हुए)
अगर फोल्ड (मोड़ने) के परिणामस्वरूप मूल नोट की लंबाई या चौड़ाई 5 मिमी से कम हो जाती है, तो टूटे हुए / मुड़े हुए नोटों को अनुपयुक्त नोट के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा।
(ix) डीकलरेशन (विरंजन)
यदि स्याही आंशिक रूप से या पूरी तरह से नोट की सतह से गायब है, तो इस प्रकार विरंजन से प्रभावित नोटों को अनुपयुक्त के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा। नोट के आगे और पीछे दोनों तरफ विरंजन हेतु जाँच की जानी चाहिए।
(x) रिपेयर (सुधारना)
एक सुधारा गया नोट वह है जिसे एक ही नोट के हिस्सों को एक साथ जोड़कर एक सुधार किया गया नोट बनाया जाता है, जैसे टेप, कागज या गोंद जैसी बाहरी सामग्री का उपयोग करके। निम्नलिखित प्रकार के सुधार किए गए नोटों को संदिग्ध/अस्वीकृत के रूप में क्रमबद्ध किया जाएगा:
-
100 मिमी² से अधिक क्षेत्र को कवर करने वाले सुधार; या
-
बाहरी सामग्री की मोटाई 50 माइक्रोन या अधिक; या
-
बाहरी सामग्री की चौड़ाई 10 मिमी या अधिक; या
-
बाहरी सामग्री की लंबाई 10 मिमी या अधिक
6. कटे-फटे, अपूर्ण, बेमेल नोट और निर्मित नोट
6.1 नोट वापसी नियमावली (एनआरआर 2009, दिसंबर 2018 में संशोधित) में परिभाषित इन नोटों को संदिग्ध/अस्वीकृत के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
6.2 किसी भी गलत कार्य से बचाने हेतु संदिग्ध/अस्वीकृत नोटों का व्यक्तिगत निरीक्षण किया जाएगा।
7. मशीनों का कैलब्रैशन और आवधिक परीक्षण
बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि सटीकता और निरंतरता के लिए नोट सॉर्टिंग मशीनों का तिमाही आधार पर परीक्षण किया जाता है और यदि आवश्यक हो तो पुन: अंशशोधन किया जाता है। इस आशय का एक प्रमाण पत्र (बैंक अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित) रिकॉर्ड के लिए रखा जाएगा। तिमाही परीक्षण की आवधिकता का पालन संलग्न प्रारूप के अनुसार किया जा सकता है।
8. नोट सॉर्टिंग मशीनों (एनएसएम) के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा जारी मानक
8.1 भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भारतीय रिज़र्व बैंक और अन्य हितधारकों के साथ उचित परामर्श के बाद, नोट सॉर्टिंग मशीनों (एनएसएम) के लिए मानक 'IS 18663: 2024' को 19 मार्च, 2024 को 'भारत के राजपत्र' में प्रकाशित किया। मानक बीआईएस वेबसाइट पर उपलब्ध हैं (https://standards.bis.gov.in/website)
बीआईएस प्रमाणित एनएसएम मॉडलों की सूची निम्नलिखित लिंक पर प्राप्त की जा सकती है:
भारतीय विनिर्माताओं के लिए: https://manakonline.in/MANAK/ApplicationLicenceRelatedrpt
विदेशी विनिर्माताओं के लिए: https://www.bis.gov.in/fmcs/licensee/?lang=en
8.2 बैंकों में तैनात ऐसे नोट सॉर्टिंग मशीन (NSM) मॉडल, जिनका उत्पादन बंद हो गया है, ऐसे मॉडल को 30 जून, 2027 या उसके पूर्व चरणबद्ध तरीके से उपयोग से बाहर करना है। इस समय-सीमा का सख्ती से पालन किया जाए। गैर-अनुपालन की स्थिति में "मुद्रा वितरण और विनिमय के लिए प्रोत्साहन और ग्राहक सेवा प्रदान करने और लेनदेन/शेषों की रिपोर्टिंग में कमी के लिए बैंक शाखाओं और मुद्रा तिजोरियों के लिए आर्थिक दंडात्मक प्रावधानों पर मास्टर निदेश (27 मई 2026 को अद्यतित))” के अंतर्गत उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया जाएगा। भविष्य में बैंक द्वारा केवल बीआईएस प्रमाणित नोट सॉर्टिंग मशीन (NSM) ही खरीदे जाएंगे।
अनुलग्नक
वापस लिए गए परिपत्रों की सूची
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