7 अक्तूबर 2026
विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य
7 अक्तूबर 2026
विनियमन
1. लेखा समेकक (अकाउंट एग्रीगेटर) ढांचे के माध्यम से ग्राहक सुविधा में सुधार के उपाय
ग्राहकों की सुविधा में सुधार करने के उद्देश्य से, एनबीएफसी-लेखा समेकक (एनबीएफ़सी-एए) के बीच परस्पर सुगमता (इंटरऑपरेबिलिटी) लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके माध्यम से ग्राहक अपनी पसंद के किसी भी एनबीएफसी-एए के माध्यम से विभिन्न वित्तीय सूचना प्रदाताओं के पास उपलब्ध अपनी वित्तीय जानकारी को प्राप्त और साझा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा विनियमित डिपॉजिटरी को एनबीएफसी-एए के माध्यम से अपने समेकित खाता विवरण (सीएएस) में बैंक जमा खातों से संबंधित जानकारी शामिल करने की सुविधा दी जा रही है। इससे डीमैट खाताधारक, डीमैट खाता धारिता और बैंक जमा खातों से जुड़ी जानकारी सीएएस में एक ही स्थान पर देख पाएंगे। डीमैट खाते न रखने वाले ग्राहकों सहित सभी ग्राहक अपनी वित्तीय जानकारी का समेकित विवरण प्राप्त करना जारी रख सकते हैं और एनबीएफसी-एए के माध्यम से इसे साझा भी कर सकते हैं। इन दोनों प्रयासों का उद्देश्य ग्राहक सुविधा को बेहतर बनाना है और इन्हें 31 दिसंबर 2026 तक लागू किए जा सकते हैं।
वित्तीय बाज़ार
2. वित्तीय बाजार के लिए तकनीकी परामर्शदात्री समिति का गठन
तेजी से बदलते वित्तीय बाजार और अवसंरचना की पृष्ठभूमि में, रिज़र्व बैंक ने वित्तीय बाज़ार के लिए एक तकनीकी परामर्शदात्री समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति रिज़र्व बैंक द्वारा मुद्रा, सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाजार के साथ-साथ संबंधित डेरिवेटिव बाजार तथा अवसंरचना से जुड़े नीतिगत एवं परिचालनगत मामलों पर बाजार प्रतिभागियों और हितधारकों के साथ संरचित संवाद करने वाले मंच के रूप में कार्य करेगी। तकनीकी परामर्शदात्री समिति के गठन और विचारार्थ विषयों की अधिसूचना अलग से जारी की जाएगी।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/1265 |