21 अगस्त 2026
भारतीय रिज़र्व बैंक ने श्री राम फाइनेंस कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 19 अगस्त 2026 के आदेश द्वारा, श्री राम फाइनेंस कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (कंपनी) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘अभिशासन’ और ‘भारतीय रिज़र्व बैंक (अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)) निदेश' संबंधी निदेशों के कतिपय प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹8.10 लाख (आठ लाख दस हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58 बी(5)(एए) के साथ पठित धारा 58जी(1)(बी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
31 मार्च 2025 को कंपनी की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा कंपनी का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर कंपनी के उत्तर, इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
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कंपनी प्रबंधन में परिवर्तन के कारण निदेशक नियुक्त करते समय आरबीआई से पूर्व लिखित अनुमति लेने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप स्वतंत्र निदेशकों को छोड़कर, 30 प्रतिशत से अधिक निदेशकों में परिवर्तन हुआ;
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कंपनी अपने ग्राहकों को निम्न, मध्यम और उच्च जोखिम श्रेणी के रूप में वर्गीकृत करने के लिए एक प्रणाली स्थापित करने में विफल रही; और,
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कंपनी निर्धारित समय-सीमा के भीतर कतिपय ग्राहकों के केवाईसी अभिलेखों को केंद्रीय केवाईसी अभिलेखागार पर अपलोड करने में विफल रही।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(ब्रिज राज)
मुख्य महाप्रबंधक
प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/943 |