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बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – अगस्त 2026

30 सितंबर 2026

बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – अगस्त 2026

वर्ष 2026 के अगस्त माह के लिए 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से जुटाए गए बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन संबंधी आंकड़े, जो सभी एससीबी1 के कुल खाद्येतर ऋण का लगभग 95 प्रतिशत होता है, विवरण I और II में दिए गए हैं।

वर्ष-दर-वर्ष (व-द-व) आधार पर, खाद्येतर बैंक ऋण2 31 अगस्त 2026 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार 18.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि यह पिछले वर्ष (अर्थात, 5 सितंबर 2025) के इसी पखवाड़े में 10.2 प्रतिशत था।

31 अगस्त 2026 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • कृषि और संबद्ध कार्यकलापों हेतु प्रदत्त ऋण में 17.2 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष संवृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 7.6 प्रतिशत थी।

  • उद्योग क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 18.2 प्रतिशत (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 7.0 प्रतिशत थी) की संवृद्धि दर्ज की गई। जहां 'बड़े' और 'मध्यम' उद्योगों को दिए जाने वाले ऋण में तेजी से वृद्धि हुई, वहीं 'सूक्ष्म और लघु' उद्योगों में भी सतत विस्तार देखा गया। प्रमुख उद्योगों में, 'अवसंरचना', 'सभी अभियांत्रिकी', 'मूल धातु एवं धातु से बने उत्पाद', ‘रसायान और रासायनिक उत्पाद', 'खाद्य प्रसंस्करण', 'वस्त्र', 'निर्माण' और 'पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन' को दिए जाने वाले ऋण में तेजी से वृद्धि हुई।

  • सेवा क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 24.3 प्रतिशत की दर से संवृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 10.3 प्रतिशत थी), जिसे ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (एनबीएफसी), ‘व्यापार’, ‘पेशेवर सेवाएँ’ और ‘वाणिज्यिक स्थावर संपदा’ जैसे क्षेत्रों में तेजी से हुई संवृद्धि से मदद मिली।

  • वैयक्तिक ऋण क्षेत्र हेतु प्रदत्त ऋण में 16.9 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष संवृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह एक वर्ष पहले 11.9 प्रतिशत थी। जहां ‘वाहन ऋण’ और ‘आवास’ जैसे क्षेत्रों में लगातार दो अंकों में संवृद्धि दर्ज की गई, वहीं ‘क्रेडिट कार्ड बकाया’ और ‘स्वर्ण आभूषणों के बदले लिए जाने वाले ऋण’ क्षेत्र में संवृद्धि धीमी हुई।

अजीत प्रसाद    
उप महाप्रबंधक (संचार)

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/1219


1 आंकड़े महीने के अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े से संबंधित हैं, जो क्षेत्र-वार और उद्योग-वार बैंक ऋण (एसआईबीसी) विवरणी पर आधारित हैं। 31 दिसंबर 2025 से, बैंकिंग विधि (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा को बदलकर महीने का अंतिम दिन कर दिया गया है। तदनुसार, दिसंबर 2025 से वर्ष-दर-वर्ष संवृद्धि दरें चालू वर्ष के लिए महीने के अंत के आंकड़ों और पिछले वर्ष के इसी महीने के लिए अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े (पुरानी परिभाषा के अनुसार) के आंकड़ों पर आधारित हैं।

2 खाद्येतर ऋण संबंधी आंकड़े धारा-42 विवरणी पर आधारित हैं, जिसमें सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी) शामिल हैं।

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