वित्तीय बाजार

सुचारू ढ़ंग से कार्य करने वाले, चलनिधि युक्त और लचीले वित्तीय बाजार मौद्रिक नीति अंतरण और भारत के विकास के वित्तपोषण में अपरिहार्य जोखिमों के आवंटन और अवशोषण में सहायता करते हैं।

विहंगावलोकन

रिज़र्व बैंक के पास ब्याज दर और विदेशी मुद्रा बाजारों को विनियमित करने के लिए एक विधायी अधिदेश है जो वित्तीय प्रणाली के आघात सह कामकाज व व्यापक अर्थव्यवस्था और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस अधिदेश के भाग के रूप में, रिज़र्व बैंक को सरकारी प्रतिभूति बाज़ार सहित ब्याज दर बाज़ार, सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड्स में रेपो के लिए बाजार सहित मुद्रा बाजार; विदेशी मुद्रा बाजार; ब्याज दरों/कीमतों, विदेशी विनिमय दरों और ऋण पर डेरिवेटिव के विनियमन, विकास और अन्वेक्षण का कार्य सौंपा गया है; । रिज़र्व बैंक इन बाजारों के लिए वित्तीय बाजार बेंचमार्क सहित वित्तीय बाजार के बुनियादी ढांचे के विनियमन के लिए भी जिम्मेदार है। रिज़र्व बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999, अर्हित वित्तीय संविदा द्विपक्षीय समतुलन अधिनियम, 2020 और भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के व्यापक वैधानिक ढांचे के भीतर वित्तीय बाजारों को विनियमित करता है।

रिज़र्व बैंक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2018 के तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (ईटीपी) को प्राधिकृत करता है। ईटीपी एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के अतिरिक्त कोई भी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है, जिस पर पात्र इन्स्ट्रूमेंट्स जैसे प्रतिभूतियों, मुद्रा बाजार के इन्स्ट्रूमेंट्स, विदेशी मुद्रा इन्स्ट्रूमेंट्स डेरिवेटिव में लेनदेन अनुबंधित होता है। कोई भी संस्था भारतीय रिज़र्व बैंक से पूर्व प्राधिकरण प्राप्त किए बिना ईटीपी का संचालन नहीं करेगी। आरबीआई द्वारा प्राधिकृत ईटीपी की सूची यहां उपलब्ध है।

कुशल मूल्य निर्धारण और वित्तीय साधनों के मूल्यांकन के लिए वित्तीय बेंचमार्क की मजबूती और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है। आरबीआई द्वारा विनियमित बाजारों में बेंचमार्क प्रक्रियाओं के शासन में सुधार के लिए, वित्तीय बेंचमार्क प्रशासक (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2019, जून 2019 में जारी किए गए थे। आरबीआई द्वारा अधिसूचित महत्वपूर्ण बेंचमार्क्स के लिए फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इन निदेशों के तहत एक प्रशासक के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत है। अधिसूचित महत्वपूर्ण बेंचमार्क्स की सूची यहां उपलब्ध है।

एक मजबूत, निष्पक्ष, तरल, खुले और उच्च नैतिक मानकों के आधार पर उचित रूप से पारदर्शी बाजार को बढ़ावा देने और रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित बाजारों में दुरुपयोग को रोकने के लिए, सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं के अनुरूप भारतीय रिज़र्व बैंक (बाजार के दुरूपयोग का बचाव) निदेश, 2019 को लागू किया गया है।

ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) ब्याज दर, विदेशी मुद्रा और क्रेडिट डेरिवेटिव बाजारों में शासन और आचरण के उच्चतम मानकों को बढ़ावा देने के लिए, मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (ओटीसी डेरिवेटिव में मार्केट-मेकर्स) निदेश, 2021 ओटीसी डेरिवेटिव लेनदेन के लिए उत्पाद और उपयोगकर्ता उपयुक्तता, शासन व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन के लिए नियामकीय रूपरेखा निर्धारित करता है।

व्यापक विनियामक ढांचा और लिखतें

बाज़ार अवसंरचना

आगे की राह


वित्तीय बाजार, संसाधनों के कुशल आवंटन और जोखिमों को साझा करके अर्थव्यवस्था की संवृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके महत्व को देखते हुए, वित्तीय बाजारों का विकास हमेशा रिज़र्व बैंक की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा है। तदनुसार, रिज़र्व बैंक, सुरक्षित और स्थिर वित्तीय बाजारों को विकसित करने के लिए सरकार और अन्य हितधारकों के साथ सक्रिय समन्वय के साथ नीतिगत सुधारों और विनियामकीय नीतियों का कार्य कर रहा है जो वित्तीय बाजारों की गहराई और व्यापकता को बढ़ाकर कुशल मूल्य खोज की सुविधा प्रदान करते हैं और व्यापार और जोखिम प्रबंधन के लिए उपयुक्त उत्पाद प्रदान करते हैं। इस दृष्टिकोण के एक पहलू के रूप में, रिज़र्व बैंक पहुंच को आसान बनाने, भागीदारी बढ़ाने, नवाचार की सुविधा, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष आचरण को बढ़ावा देकर व्यापक आधारीय बाजारों का प्रयास करता है।

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